UNESCO करेगा राजस्थानी संस्कृति का प्रचार, जानिए क्यों पड़ी जरूरत?

भारत सरकार ने आइकॉनिक साइटस स्मारकों को विकसित करने की बजट घोषणा की थी. इसके लिए पर्यटन विभाग की ओर से 3.15 करोड की डीपीआर भारत सरकार को सौंपी गई है. 

UNESCO करेगा राजस्थानी संस्कृति का प्रचार, जानिए क्यों पड़ी जरूरत?
इसका उद्देश्य स्थानीय ग्रामीण परिवेश की कला और कलाकारों का प्रोत्साहन करना है.

दामोदर प्रसाद, जयपुर: पश्चिमी राजस्थान में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने यूनेस्को (UNESCO) के साथ एमओयू किया है. इससे जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर में एक विशेष पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा ताकि पर्यटन की दृष्टि से ग्रामीण क्षेत्रों को विकसित किया जाए. 

इसके लिए जोधपुर के 450 लोक कलाकार, बाड़मेर के 550 और जैसलमेर और बीकानेर के 250-250 कलाकारों का चयन किया जाएगा.

दरअसल, इन जिलों के हस्तशिल्प, लोक नृत्य और संगीत सहित अन्य सांस्कृतिक परंपराएं अब धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं. प्रचार-प्रसार नहीं होने से कलाएं और कलाकारों की संख्या भी कम होती जा रही है. इन 4 जिलों के कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूनेस्कों के माध्यम से पहचान दी जाएगी. इसके साथ-साथ 1500 ग्रामीण कलावंत लाभंवित होंगे. अपनी नैसृगिक और कौशल क्षमताओं का विकास कर पर्यटकों से सीधे जुडकर स्थानीय ग्रामीण परिवेश की कला और कलाकारों को प्रोत्साहन करना है.

पर्यटन स्वीकृति के इंतजार में आमेर महल 
भारत सरकार ने आइकॉनिक स्मारक के रूप आमेर महल को विकसित किया जाएगा. भारत सरकार ने आइकॉनिक साइटस स्मारकों को विकसित करने की बजट घोषणा की थी. इसके लिए पर्यटन विभाग की ओर से 3.15 करोड की डीपीआर भारत सरकार को सौंपी गई है. पर्यटन विभाग ने संभावना जताई कि जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है. वहीं ट्राइवल सर्किट, डेजर्ट सर्किट, वाइल्ड लाइफ सर्किट इसमें ट्राइवल सर्किट के तहत उदयपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर को शामिल किया गया है. उम्मीद है कि इन जिलों की पर्यटन स्वीकृति भी मिल जाएगी.

धरोहर के बारे में जागरूकता बढ़ाना मुख्य मकसद
बांसवाड़ा में टापुओं के विकास के लिए पहले भी चर्चा हुई है. इसके लिए पर्यटन विभाग ट्राइवल के तहत विकसित करने की योजना बना रहा है. ग्रामीण क्षेत्र में 10 नए पर्यटक स्थल विकसित कर पर्यटकों का इन जिलों में ठहराव बढ़ाना और सामाजिक और आर्थिक स्थिति में गुणात्मक सुधार कर समाज का सशक्तिकरण कर उसका अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करना है. विशेषकर युवाओं में भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जागरूकता बढ़ाना और आगामी पीढ़ी में परंपरागत ज्ञान का प्रसारण करने के लिए भी परियोजना में विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

Edited by : Pooja Sharma, News Desk