अलवर: कड़ाके की ठंड का लुत्फ उठा रहे पर्यटक, अरावली की पहाड़ियों में दिख रहा शानदार नजारा

अलवर जिले में पिछले साल 2019 में देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है.

अलवर: कड़ाके की ठंड का लुत्फ उठा रहे पर्यटक, अरावली की पहाड़ियों में दिख रहा शानदार नजारा
फाइल फोटो

अलवर: जिले में पिछले साल 2019 में देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है. दिसंबर में कड़ाके के सर्दी के बावजूद भी पर्यटकों की संख्या कम नहीं हुई.

महाराजा भृतहरि की तपो भूमि अलवर को सिंह द्वार भी कहा जाता है. दिल्ली जयपुर के मध्य अरावली की पहाड़ियों में बसा अलवर पर्यटकों को आकर्षित करता है. अलवर की पहचान सरिस्का टाइगर सेंचुरी से विश्व पटल के मानचित्र पर है. यहां हर साल देशी विदेशी पर्यटकों के आने का सिलसिला भी लगातार बढ़ता जा रहा है. 

खास कर हाल ही बने बायोडायवर्सिटी पार्क में इस साल अन्य पर्यटन स्थलों से ज्यादा पर्यटक पहुंचे हैं, लेकिन अभी भी पर्यटन के क्षेत्र में आपार सम्भावनाओं के मद्देनजर जनप्रतिनिधी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं.

अलवर जिले में पर्यटन क्षेत्र में आपार संभावनाएं हैं. यहां जीर्ण शीर्ण पड़े किलों को मिलाकर देखे तो यहां 52 किले हैं. इसके अलावा भी मुख्य पर्यटक स्थल सरिस्का, सिलीसेढ़, बाला किला सहित सागर और मूसी महारानी की छतरी पर्यटकों को खूब भा रहे हैं. इसके अलावा अलवर में शहर से मात्र तीन किलोमीटर दूर नगर विकास न्यास द्वारा वन विभाग की भूमि पर बनाये गए बायोडायवर्सिटी पार्क पर सबसे ज्यादा पर्यटक इस वर्ष पहुंचे हैं.

पिछले साल 2019 में अक्टूबर तक 3 लाख 66 हजार 289 पर्यटक अलवर घूमने आए. जबकि इससे पहले 2018 में इनकी संख्या 2 लाख 89 हजार 627 थी. दिल्ली जयपुर से कड़ाके की ठंड में भी लोग नए साल के छुट्टियों का आनंद लेने अलवर पहुंचे.

प्रतापबन्ध के पास 10 हेक्टयर में वन विभाग की भूमि पर बने बायोडायवर्सिटी पार्क का निर्माण करीब 4 करोड़ 18 लाख की लागत से नगर विकास न्यास द्वारा किया गया. इसमें जॉगिंग ट्रेक, बटर फ्लाई कंजर्वेशन जॉन, चिल्ड्रन पार्क, योगापार्क, ओपन एयर जिम भी बनाये गए हैं. 

इतना ही नहीं यहां 700 करीब औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं, जिसमें आंवला, ग्वारपाठा, तुलसी, चन्दन, अमलदास, पैंडुला और अशोक आदि शामिल हैं. चारों तरफ हरियाली पहाड़ियों से घिरा यह स्थल बरबस पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.

अलवर आये देशी और विदेशी पर्यटकों में दिसम्बर माह में बाला किला पर 9868 पर्यटक पहुंचे. वहीं सिलीसेढ़ में 7 हजार, म्यूजियम में 5821, सरिस्का में 4900 पर्यटकों का आना दिसम्बर में हुआ, लेकिन सबसे ज्यादा 13 हजार पर्यटक दिसम्बर में अलवर के बायोडायवर्सिटी पार्क में पहुंचे.

अलवर के अन्य पर्यटक स्थलों की भी दशा अगर और सुधारी जाए तो यहां पर्यटन के क्षेत्र में आपार समभावनाएं बन सकती है. जिले के एक मात्र मंत्री टीकाराम जूली भी मानते हैं कि इस तरफ जितना ध्यान दिया जाना चाहिए था उतना नहीं दिया गया.