जोधपुर: मेहरानगढ़ फोर्ट देखने में पर्यटकों को आ रही परेशानी, रास्ता ही बना रोड़ा

राजस्थान आने वाला हर टूरिस्ट जोधपुर का मेहरानगढ़ फोर्ट देखने के लिए अवश्य आता है.   

जोधपुर: मेहरानगढ़ फोर्ट देखने में पर्यटकों को आ रही परेशानी, रास्ता ही बना रोड़ा
जोधपुर का मेहरानगढ़ फोर्ट

अरुण हर्ष, जोधपुर: राजस्थान आने वाला हर टूरिस्ट जोधपुर का मेहरानगढ़ फोर्ट देखने के लिए अवश्य आता है. मेहरानगढ़ फोर्ट(Mehrangarh Fort) तक जाने के लिए जो रास्ता है वह काफी संकरा और घुमावदार है,जिसके कारण वहां पर घंटों जाम लग जाता है. जाम लगने से पर्यटकों के साथ-साथ शहरवासियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा है, जिसके कारण जोधपुर शहर की एक अलग ही छवि लेकर पर्यटक यहां जा रहे हैं.

मेहरानगढ़(Mehrangarh Fort) जाने वाले पर्यटकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के डायरेक्टर करणी सिंह जसोल का मानना है कि लंबे समय से प्रशासन के साथ कई पत्राचार हुए और वैकल्पिक मार्ग को लेकर भी संपर्क किया गया, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के चलते वैकल्पिक मार्ग जो बालसमंद से रावटी होकर मेहरानगढ़ फोर्ट आता है उसका कार्य 70 पर्सेंट पर ही अटका हुआ है. 

सड़क कार्य नहीं होने से पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं नागोरी गेट से मेहरानगढ़(Mehrangarh Fort) आने वाला रास्ता भी संकरा और घुमावदार होने के कारण वहां पर जाम लगने से पर्यटक और आम शहरवासी परेशान रहते हैं. जाम के कारण गाड़ियों के इंजन से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है.

मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के डायरेक्टर करणी सिंह जसोल के अनुसार जोधपुर के मेहरानगढ़ फोर्ट(Mehrangarh Fort) देखने के लिए हर साल करीब 12 लाख पर्यटक आते हैं. ऐसे में प्रशासन को ट्रैफिक जाम की समस्या को लेकर गंभीरता से कार्य करना चाहिए, जिससे बाहर से आने वाले पर्यटक जोधपुर की एक अच्छी छवि लेकर जा सके.

पुलिस प्रशासन ने यातायात पुलिस के साथ साथ वहां के थाने के स्टाफ को भी यातायात को सुचारू करने के लिए लगा रखा है, लेकिन इन सब के बावजूद भी कई बार जाम लग जाता है. जोधपुर ईस्ट  डीसीपी धर्मेंद्र सिंह का मानना है कि पर्यटन सीजन में कई बार जाम की स्थिति बन जाती है क्योंकि पुराना शहर होने की वजह से और गलियां संकरी होने की वजह से जाम लग जाता है और जिसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं को तलाशने का प्रयास चल रहा है.