दो युवकों ने किया बच्चे के पिता होने का दावा, यूं ढूंढ़ा असली जैविक पिता

सिरोही जिले (Sirohi News) में एक अजीबीगरोब मामला सामने आया, जिसमें एक बालक पर दो लोग पिता होने का दावा कर रहे थे, लेकिन प्रशासन और बाल संरक्षण आयोग (Child Protection Commission) की ओर से डीएनए टेस्ट (DNA test) करवाकर बालक को उसके असली पिता को सोप दिया गया. 

दो युवकों ने किया बच्चे के पिता होने का दावा, यूं ढूंढ़ा असली जैविक पिता
बाल संरक्षण समिति के सदस्यों के अनुसार मामला सिरोही जिले की रेवदर तहसील और जालौर जिले का है.

साकेत गोयल, सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले (Sirohi News) में एक अजीबीगरोब मामला सामने आया, जिसमें एक बालक पर दो लोग पिता होने का दावा कर रहे थे, लेकिन प्रशासन और बाल संरक्षण आयोग (Child Protection Commission) की ओर से डीएनए टेस्ट (DNA test) करवाकर बालक को उसके असली पिता को सोप दिया गया. सिरोही जिले में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर बच्चे को उसके जैविक पिता को सौंपा गया है. जिला बाल संरक्षण समिति के सदस्यों ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा संगीता बेनीवाल (Sangeeta Beniwal) की मौजूदगी में बच्चे को उसके बायालॉजिकल पिता को सुपुर्द किया.

बाल संरक्षण समिति के सदस्यों के अनुसार मामला सिरोही जिले की रेवदर तहसील और जालौर जिले का है. जालौर की एक युवती का वहीं के युवक से प्रेम प्रसंग था. 2014 में युवती की शादी सिरोही जिले के युवक से हो गई. 2017 तक वह ससुराल में ही रही. इन तीन के अंत में वह अपने पूर्व प्रेमी के संपर्क में फिर आई. 2017 के अंत में ही युवती की डिलीवरी हुई. डिलीवरी के बाद वह बच्चे को लेकर ससुराल को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ जालौर चली गई. अपने प्रेमी के साथ लीव इन रिलेशनशिप में रहने लगी. 2020 में युवती की मृत्यु हो गई. इसके बाद उसके पति ने रेवदर में उसके बच्चे को दिलवाने की न्यायिक गुहार लगाई.

प्रेमी ने इस बच्चे पर अपना दावा पेश किया. रेवदर उपखण्ड अधिकारी ने इस मामले से जिला बाल अधिकार संरक्षण समिति को अवगत करवाया. इस पर समिति ने इस प्रकरण को संज्ञान लेते हुए बच्चे की कस्टडी ले ली. इसके बाद बच्चे के जैविक पिता की जानकारी के लिए डीएनए टेस्ट करवाने का निर्णय किया. राज्य बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने बताया कि डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद शुक्रवार को बाल अधिकार संरक्षण भवन में रह रहे बच्चे को राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा संगीता बेनीवाल, जिला कलक्टर भगवती प्रसाद व  पुलिस अधीक्षक हिम्मत अभिलाष टांक की मौजूदगी में बच्चे को उसके जैविक पिता, जो कि युवती का पति था, उसे सौंप दिया गया. 

जब पिता को अपने बेटा मिलते ही उसने अपने बेटे को गोदी में उठा लिया. पिता बेटे के मिलने पर फूला नहीं समा रहा था तथा बाल सरंक्षण आयोग व प्रशासन को धन्यवाद दे रहा है, जिनकी बदौलत ही उसका बेटा आज उनको मिला.

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