उदयपुर: BJP नेता गुलाबचंद कटारिया की बढ़ी चुनौती, विरोध में उतरे कई नेता

सालों तक मेवाड़ में पार्टी को मजबूत करने के लिए कंधे से कंधा मिला कर काम करने वाले नेता अब एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं.

उदयपुर: BJP नेता गुलाबचंद कटारिया की बढ़ी चुनौती, विरोध में उतरे कई नेता
किसी को पार्टी का साथ मिला तो किसी ने दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: दुनिया में दोस्ती को सबसे खूबसूरत रिश्ते के तौर पर देखा जाता है लेकिन ये रिश्ता जब दुश्मनी में बदलता है तो फिर सियासत शुरू हो जाती है. कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों उदयपुर के सियासी मैदान में भी देखने को मिल रहा है. जहां भाजपा को मेवाड़ में मजबूत करने वाले नेताओं का एक बडा कुनबा चुनावी मैदान में आमने सामने खडा है.

सालों तक मेवाड़ में पार्टी को मजबूत करने के लिए कंधे से कंधा मिला कर काम करने वाले नेता अब एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं. प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया कभी पार्टी के वरिष्ठ नेता मांगीलाल जोशी, दलपत सुराणा, शान्तिलाल चपलोत के साथ मिल कर मेवाड में पार्टी को मजबूत करते थे. लेकिन जब इनके बीच स्वार्थ की राजनीति शुरू हुई तो सभी ने अपनी-अपनी राहें जुदा कर लीं.

किसी को पार्टी का साथ मिला तो किसी ने दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया. खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताने वालों ने बगावत शुरू कर दी. आलम ये है कि चुनावी मैदान में गुलाबचंद कटारिया को जनता सेना के उम्मीदवार दलपत सुराणा और उनके पुराने दोस्तों की टीम चुनौती दे रही है.

सब कुछ पाने की चाह के इस दौर में हर शख्स खुद से भी आगे निकलने की कोशिश में जुटा हुआ है. स्वार्थसिद्धी की यही कशमकश रिश्तों में दरार डाल देती है. यही वजह है कि गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया और उनके दोस्त से सियासी दुश्मन बने लोगों की लिस्ट बहुत लम्बी हो चुकी है. वहीं कभी दोस्त रहे लोग इस वक्त के सियासी दुश्मन बन चुके है और आरोप लगा रहे है कि कटारिया की वजह से उनकी सियासत खत्म हो गई. 

हालांकि खुद कटारिया कई बार इन आरोपों का खारिज कर चुके हैं और सभी को पार्टी और राष्ट्र के हित में काम करने की नसीहत दे रहे हैं. हालांकि कटारिया अपने आप के लिए इन सियासी दुश्मनों को खतरा नहीं मानते है.

बहरहाल कहा जाता है कि घर का भेदी लंका ढाए फिर सियासत में वैसे भी किसी पर भरोसा नहीं किया जाता है. क्योंकि राज जानने वाला दोस्त जब दुश्मन बन जाते है तो मुसीबतें सिर पर किसी टूटी हुई इमारत की तरह गिर जाती है. ऐसे में मेवाड़ के चुनावी रण में कटारिया के हर दांव को बखूबी जानने वाले उनके सियासी दुश्मन दलपत सुराणा और टीम अपनी रणनीति को सफल बनाने में जुटे हुए है. लेकिन सवाल है कि इस जंग का कौन बाजीगर बनेगा.