close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

उदयपुर: जन्माष्टमी पर नाथजी मंदिर में हुई खास तैयारी, भगवान कृष्ण को दी जाएगी 21 तोपों की सलामी

जन्माष्टमी के दूसरे दिन नंद महोत्सव मनाया जाता है. इस नंद महोत्सव में प्रभु श्रीनाथजी को सोने के पलने में विराजित कर झूला झुलाया जाता है.

उदयपुर: जन्माष्टमी पर नाथजी मंदिर में हुई खास तैयारी, भगवान कृष्ण को दी जाएगी 21 तोपों की सलामी
जन्माष्टमी के दूसरे दिन मंदिर में नंद महोत्सव मनाया जाता है.

विनीता पालीवाल, राजसमंद: नाथद्वारा कांकरोली वैष्णव सम्प्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी और तृतीय पीठ द्वारिकाधीश मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव की खुशी में रात 12 बजे 21 तोपों की सलामी से स्वागत किया जाएगा. भगवान के आगमन पर 21 तोपों की सलामी देने वाला विश्व मे श्री नाथजी का अनूठा मंदिर हैं. जन्माष्टमी पर्व आयोजन से जुड़े कई तरह के आयोजन होंगे इन सबके बीच पुष्टि संप्रदाय की तृतीय पीठ द्वारा प्रभु द्वारकाधीश मंदिर कांकरोली में भी इस महोत्सव को लेकर भव्य तैयारियां की गई हैं.

श्री नाथजी मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं. जैसे कि जन्माष्टमी के दिन सुबह 5 बजे मंगला दर्शन के पश्चात प्रभु श्री नाथजी को केसर युक्त पंचामृत स्नान होता है जिसमें प्रभु श्री श्रीनाथजी को दूध दही, शक्कर और जल से पंचामृत स्नान करवाया जाता है. जिसके बाद भगवान श्रीनाथजी का विशेष श्रंगार किया जाता है. दोपहर तक के सभी नियमित दर्शनों के पश्चात शाम 9 बजे को प्रभु श्रीनाथजी के जागरण के दर्शन खुलते हैं. 

रात को 11:30 बजे यह दर्शन बंद होता है उसके बाद मंदिर पुरोहित द्वारा ग्रहों की गणना वह स्थिति के आधार पर प्रभु जन्म का समय निर्धारित होता है और उस पर रिसाला चोक में श्री नाथ गार्ड द्वारा 21 तोपो की सलामी दी जाती है. प्रभु के जन्म के दर्शन खुलते हैं साथ प्रभु के जन्म उद्घोषणा होती है और प्रभु के दर्शन खुलते हैं यह दर्शन जन्म के दर्शन कहलाते हैं. 

इन दर्शनों में ही प्रभु के छोटे स्वरूप लालनजी का पंचामृत स्नान किया जाता है. जन्माष्टमी के दूसरे दिन नंद महोत्सव मनाया जाता है. इस नंद महोत्सव में प्रभु श्रीनाथजी को सोने के पलने में विराजित कर झूला झुलाया जाता है. प्रभु के सम्मुख कई तरह के सोने-चांदी और लकड़ी से बने खिलौने चलाए जाते हैं. वहीं ग्वाल बाल दूध दही की होली खेलते हैं. पूरा मंदिर परिसर नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठता है. 

दूर-दूर से लोग इस अद्भुत नजारे के दर्शन करने के लिए लाखो की तादात में मंदिर की तरफ दौड़े चले आते हैं. हजारों श्रद्धालु कृष्ण जन्मोत्सव के आनंद से सराबोर होते हैं और प्रभु की जय जय कार करते हैं. वास्तव में पुष्टि संप्रदाय की प्रधानपीठ पर कृष्ण जन्म का यह आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है. गौरतलब है कि वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ के साथ साथ अलग-अलग पीठ पूरे भारतवर्ष में स्थित हैं. जिन्हें पुष्टिमार्गीय हवेली के नाम से संबोधित किया जाता है और यहां पुष्टिमार्ग नियम व सेवा प्रणाली के अनुसार राग भोग और श्रंगार की बालस्वरूप में सेवा प्रभु को अंगीकार करवाई जाती है.