दिल्ली-मुंबई तक है Udaipur के इस 'गुलाल' की Demand, जानिए आखिर क्या है इसमें खास

जिले के कोटड़ा झाड़ोल कानोड़ तहसील में राजीविका महिला सर्वांगीण सहकारी समिति लिमिटेड की महिलाओं की ओर से होली के त्योहार को लेकर फूलों से हर्बल गुलाल बनाया गया है. 

दिल्ली-मुंबई तक है Udaipur के इस 'गुलाल' की Demand, जानिए आखिर क्या है इसमें खास
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Udaipur: जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार (Employment) प्रदान करने के उद्देश्य से राजीविका की ओर से महिलाओं से हर्बल गुलाल बनवाया जा रहा है. बाजार में हर्बल गुलाल (Herbal Gulal) की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. 

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जिले के कोटड़ा झाड़ोल कानोड़ तहसील में राजीविका महिला सर्वांगीण सहकारी समिति लिमिटेड की महिलाओं की ओर से होली के त्योहार को लेकर फूलों से हर्बल गुलाल बनाया गया है. 

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जिला परिषद की सीईओ डॉ. मंजू ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की साठ महिलाओं के द्वारा पिछले माह फरवरी से यह हर्बल गुलाल बना रही हैं. इस गुलाल को समिति द्वारा बाजार में दो सौ रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है. पिछले वर्ष 20 क्विंटल हर्बल गुलाल बेची गई थी लेकिन इस बार अलग-अलग जगहों पर कुल मिलाकर 70 क्विंटल हर्बल गुलाल की ब्रिकी हुई है, जिससे कुल आय 14 लाख रूपये से अधिक की हुई है. ऐसें में हर्बल गुलाल के मुनाफे को सभी महिलाओं में बराबर वितरित किया जाएगा. महिलाओं द्वारा बनाये जा रहे इस गुलाल की डिमांड हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, कोलकाता, बिहार, महाराष्ट्र सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से आ चुकी है. 

ऐसे बनता है हर्बल गुलाल
हर्बल गुलाल बनाने के लिए महिलाएं आस-पास के जंगल से पलाश के फूल, रजके के पत्ते और अन्य फूलों की पत्तियां इकट्ठा करके लाती हैं. इसके बाद इनको साफ पानी से धोया जाता है और पानी में उबाला जाता है. इस मिश्रण को छानकर ठंडा करते हैं, फिर इनमें अरारोट मिलाकर सुखाया जाता है और गुलाल का स्वरूप दिया जाता है. तीन दिन की इस प्रक्रिया में एक दिन फूल और पत्तियां बीनने में लगता है. दूसरे दिन इन्हें पानी मे उबालकर तैयार करने में और तीसरा दिन इसे सुखाने में. यह गुलाल पूर्णतः प्राकृतिक होता है जो कि शरीर पर किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुचाता है जबकि बाजार में मिलने वाला गुलाल केमिकल युक्त होता है, जो कि शरीर के लिए हानिकारक होता है.

दो सौ रुपये किलो की दर से बिकता है ये गुलाल
स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाये जा रहे इस गुलाल की लागत सौ रुपये प्रति किलो आती है. वहीं, इस गुलाल को समिति द्वारा बाजार में दो सौ रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है. इस प्रकार प्रति किलो सौ रुपये की आय होती है. यह आय प्रगति महिला सर्वांगीण सहकारी समिति लिमिटेड गोगरुद में जमा होगी.जिसे सभी सदस्यों में समान भाग में विभाजित कर दिया जाएगा. वहीं, फूल बीनने वाली महिलाओं को ढाई सौ से तीन सौ रुपये तक मजदूरी दी जाती है.

Reporter- DHEERAJ RAWAL