उदयपुर: इस ऐतिहासिक नारे ने दिलाई DCP को नई पहचान, मोदी सरकार करेगी सम्मानित

इस स्लोगन का श्रेय उदयपुर में डीएसपी पद पर तैनाद महिला पुलिस अधिकारी चेतना भाटी को मिलने जा रहा है. जिसको लेकर केन्द्र ने प्रदेश सकार को भाटी को यह प्रमाण प्रदान करने के लिए पत्र लिखा है.

उदयपुर: इस ऐतिहासिक नारे ने दिलाई DCP को नई पहचान, मोदी सरकार करेगी सम्मानित
जेलसमेर जिले में हो रही बेटियों की हत्याओं को लेकर चेताना भाटी काफी व्यतिथ रहती थीं.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: बेटी बचाओं बेटी पढाओं को नारे पिछले कुछ सालों से देश गुंज रहा है लेकिन यह स्लोगन कहा से आया और उसे किसने बनाया यह अब तक पहेली बना हुआ था. अब इस स्लोगन का श्रेय उदयपुर में डीएसपी पद पर तैनाद महिला पुलिस अधिकारी चेतना भाटी को मिलने जा रहा है. जिसको लेकर केन्द्र ने प्रदेश सकार को भाटी को यह प्रमाण प्रदान करने के लिए पत्र लिखा है.

प्रदेश का जैसलमेर जिला जो बेटियों की हत्या को लेकर बदनामी का दंश जेल चुका है. वहीं, की एक बेटी का दिया स्लोगन आज देश में बेटियों को बचाने और उन्हे पढाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा है. जी हां हम बात कर रहे है उस स्लोगन की जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ने 22 जनवरी 2015 को अपनी फ्लैगशिप योजना में घोषित किया बेटी बचाओं बेटी पढाओ. इस स्लोगन का श्रेय अब उसी जेसलमेर जिले की बेटी को मिलने जा रहा है. जहां बेटियों को बोझ समज कर मार दिया जाता था. केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को इस स्लोगन का श्रेय उदयपुर में डीएसपी पद पर तैनात चेतना भाटी को देने के लिए एक पत्र लिख दिया है. 

विभाग से मिले पत्र के बाद चेताना भाटी बताती है कि जब पीएम मोदी ने इस योजना की घोषाणा की तो उन्होने इस स्लोग को बनाने के लिए अपना श्रेय देने के लिए अपना दावा पेश किया. इसके लिए उन्होने कई आरटीआई भी लगाई और जानकारियों को जुटाया. लम्बे संघर्ष के बाद आखिर सरकार को चेताना भाटी को इस स्लोगन को बनाने का श्रेय देने के लिए अपनी सहमती जतानी पड़ी.

दअरसल, जैसलमेर जिले में हो रही बेटियों की हत्याओं को लेकर चेताना भाटी काफी व्यतिथ रहती थी. इसी दौरान उन्होने अपनी कविताओं के माध्यम से आम लोगों को बेटी बचाओं बेटी पढाआ का नारा देते हुए लोगों को जागरूक करने का काम शुरू किया. यही नहीं वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र लिख बेटी बचाओं बेटी पढाओं के एक पोस्टर का विमोचन करने का भी आग्रह किया लेकिन काई जवाब नहीं मिला. लेकिन वे बेटियों को बचाने के लिए अपने प्रयास में लगी रही.

बअरहाल, डीएसपी चेतना भाटी भले ही जैसलमेर की रहने वाली हो लेकिन इस स्लोगन को लेकर उनका उदयपुर से एक अलग ही जुवाड भी सामने आया है. जब उन्होने इस स्लोगन का श्रेय उन्हे देने के लिए क्लेम किया तो वह यहा पर सीआई पद के रूप में तैयात रही. अब जब सरकार ने उन्हे इसका श्रेय देने जो रही है तो वे यहा डीएसपी के पद पर तैनात हो कर अपनी सेवाएं दे रही है, जो एक अनुठा संयोग है. ऐसे में जी राजस्थान भी बेटियों के बचाने के लिए उनके द्धारा लिखे गए इस स्लोगन पर भाटी को बधाई देती है. साथ ही, लोगों से बेटियों को बचाने और उन्हे पढाने की अपील करता है, जिससे हमारी बेटियां भी देश के विकास पर अपना अह्म योगदान दे सकें.