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उदयपुर: अवैध खनन पर रोक नहीं लगने से ग्रामीण परेशान, उठाया यह कदम

क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन पर नजर बनाए रखने के लिए ग्रामीणों ने एक गश्ती वाहन भी तैयार किया है. जिससे 24 घंटे अवैध खनन करने वाले माफियाओं पर नजर रखी जा रही है.

उदयपुर: अवैध खनन पर रोक नहीं लगने से ग्रामीण परेशान, उठाया यह कदम
24 घंटे अवैध खनन करने वाले माफियाओं पर नजर रखी जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उदयपुर: कोर्ट के स्टे के बाद भी पिछले कई समय से उदयपुर के भलों का गुडा गांव के आस पास के क्षेत्र में चिनाई पत्थरों के हो रहे अवैध खनन के खिलाफ अब ग्रामीण मैदान में उतर गए हैं. अब तक सरकारी विभागों के दहलीज पर अवैध खनन रोकने के लिए गुहार लगाने वाले ग्रामीणों ने अपने क्षेत्र में अवैध रूप से हो रहे खनन को रोकने का जिम्मा खूद उठाने का निर्णय ले लिया है. गांव से सटे आस पास के जंलग और चरागाह की भूमि को बचाने के ग्रामीणों ने पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति का गठन कर करीब 500 लोगों की 20 टीमें तैयार की हैं. 

ये सभी टीमें अवैध रूप से हो रहे चिनाई पत्थरों के खनन को रोकने के काम में जुट गई हैं. यही नहीं इसके लिए ग्रामीणें ने बकायदा गांव को मुख्य रोड से जोड़ने वाले तीनों मार्गो पर चैक पोस्ट बना दिए हैं. इन चैक पोस्ट पर 24 घंटों ग्रामीणों ने सख्त पहरा लगा रखा है. कोई भी लॉडिंग वाहन बिना पूर्ण चैकिंग से इन चेक पोस्ट को पार नहीं कर सकता है. 

इसके साथ ही क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन पर नजर बनाए रखने के लिए ग्रामीणों ने एक गश्ती वाहन भी तैयार किया है. जिससे 24 घंटे अवैध खनन करने वाले माफियाओं पर नजर रखी जा रही है. दल के सदस्य जहां भी अवैध रूप से हो रहे खनन को देखते है तो उसकी सुचना गांव के अन्य लोगों को दी जाती है. इसके बाद वे लोग वहां पहुंच कर खनन को रूकवाते हैं. इसके बाद अग्रीम कार्रवाई के लिए इसकी सुचना संबंधित थाने में और खनन विभाग की दी जाती है. 

अवैध खनन रोकने की इस मुहिम में गांव की महिलाएं भी पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर योगदान दे रही है. दिन के समय में गांव के चैक पोस्ट पर पुरूषों के साथ महिलाएं भी तैनात रहती हैं. जो वहां से निकने वाले वाहनों को रोक कर उनकी तलाशी तक लेने का काम कर रही हैं.  

दरअसल, एक साल पहले खान विभाग के अधिकारियों ने पंचायत की एनओसी पर गांव के आस पास के पहाडों पर खनन करने की अनुमति देते हुए पट्टे जारी कर दिए थे लेकिन इसकी भनक जब ग्रामीणों को मिल तो उन्होंने इसका विरोध शुरू किया. ग्रामीणों ने स्थानिय जन प्रतिनिधियों के साथ प्रशसनिक अधिकारियों को भी खनन पट्टों को रद्द करवानें के लिए गुहार लगाई लेकिन सफल नही हुए. इस पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली और आखिर कोर्ट ने पूरे मामले पर स्टे दे दिया. ग्रामिणों का आरोप है कि सरपंच ने मिली भगत से एनओसी दे दी और जहां खनन के लिए पट्टे जारी हुए वहां पर गांव के पशु चरने के लिए जाते हैं. ऐसे में खनन होने से वो जमीन खत्म हो जाएगी और गांव के पशु धन पर संकठ आ जाएगा. 

बहरआल पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रामीणों की ओर से किया जा रहा यह प्रयास सराहनीय है. साथ ही उन अधिकारियों के लिए करारा सबक भी है जो सरकारी खजाने से मोटी पगार तो उठा लेते है लेकिन एसी कमरों से बाहन निकल कर अपनी जिम्मेदारी को निभाने में तत्पराता नहीं दिखाते है.