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Chittorgarh News: चित्तौड़गढ़ में अनंत चतुर्दशी का पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया. गणपति बप्पा के विसर्जन के लिए दोपहर से ही श्रद्धालु गंभीरी नदी के तट पर उमड़ पड़े. नगर परिषद और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए. एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें नदी में तैनात रहीं और श्रद्धालुओं से मूर्तियां लेकर स्वयं विसर्जन किया.
किसी भी व्यक्ति को नदी में उतरने की अनुमति नहीं दी गई. इस दौरान गोताखोर और हाइड्रा मशीन की मदद से मूर्तियों का सुरक्षित विसर्जन हुआ. आयोजन स्थल पर झांकियों, नृत्य और आतिशबाजी से माहौल उत्सवमय बना रहा. श्रद्धालुओं ने भावुक होकर बप्पा को विदा किया और अगले साल लौटने की कामना की. देखिये चित्तौड़गढ़ जी मीडिया संवाददाता की खास रिपोर्ट.
अनंत चतुर्दशी पर चित्तौड़गढ़ की गंभीरी नदी का तट श्रद्धालुओं की भीड़ से पट गया. गणपति बप्पा के विसर्जन के लिए भक्त सुबह से ही मूर्तियां लेकर यहां पहुंचने लगे. नदी किनारे गणपति बप्पा की आरती और पूजा-अर्चना के साथ भावुक माहौल बना रहा. महिलाएं और बच्चे भी उत्साह से गणपति को विदाई देने पहुंचे. इस दौरान हर ओर गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों की आंखें विदाई की बेला पर नम होती दिखाई दीं.
सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से प्रशासन ने सख्ती बरती. बढ़ते जलस्तर और भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं को पानी में उतरने से रोका गया. एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें नदी में तैनात रहीं और श्रद्धालुओं से मूर्तियां लेकर स्वयं विसर्जन किया. गोताखोर लगातार चौकसी में लगे रहे. वहीं हाइड्रा मशीन की मदद से बड़ी प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन कराया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं को कहीं भी असुविधा न हो इसके लिए नगर परिषद और पुलिस कर्मी लगातार तैनात रहे.
रात करीब 3 बजे नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई भव्य झांकियां गंभीरी नदी तट पर पहुंचीं. हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक शोभायात्रा के साक्षी बने. झांकियों के साथ गूंजते बैंड-बाजे, ढोल-ताशे और आतिशबाजी ने माहौल को भक्तिमय बना दिया.
जुलूस में शामिल 21 लाइसेंस प्राप्त झांकियों ने महोत्सव को और भी भव्य बना दिया. रंग-बिरंगी झांकियां, नृत्य प्रस्तुतियां और भजन-कीर्तन से हर कोई गणेशमय हो उठा. पुलिस और प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी. ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से पूरे शहर पर नजर रखी गई. भारी पुलिस जाप्ता चौराहों और विसर्जन स्थल पर तैनात रहा. इस बीच सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवकों ने जगह-जगह सेवा के स्टॉल लगाकर श्रद्धालुओं को जल, शरबत और प्रसादी वितरित की.
महोत्सव में हर किसी की आस्था जुड़ी रही. किसी ने करियर और सफलता के लिए बप्पा से आशीर्वाद मांगा. तो किसी ने परिवार की खुशहाली और स्वास्थ्य की कामना की. विदाई के क्षण हर किसी को भावुक कर गए. भक्तों ने नम आंखों से गणपति बप्पा को विदा किया. लेकिन इसी विदाई के साथ यह विश्वास भी जताया कि अगले बरस बप्पा फिर आएंगे. और चित्तौड़गढ़ की गलियां फिर गणेशमय हो उठेंगी.
तो चित्तौड़गढ़ में अनंत चतुर्दशी का यह विसर्जन महोत्सव भक्ति, उल्लास और भावनाओं का अद्भुत संगम बनकर रहा. देर रात तक गणपति बप्पा मोरया की गूंज शहर की गलियों में सुनाई देती रही. हर श्रद्धालु ने बप्पा को विदा करते समय अपने दिल से यही प्रार्थना की कि गणपति अगले साल फिर आएं और चित्तौड़गढ़ की धरती पर खुशियां और आशीर्वाद बरसाएं.