चक्रवाती तूफान Tauktae का शिकार हुए 'वागड़ के देसी आम', आंसू बहा रहे मजबूर किसान

चक्रवात की तेज आंधी ने हजारों आम के पेड़ से आम के फल गिर गए. आम के फल से लदे हजारों पेड़ एक तूफान ने झकझोर कर रख दिया.

चक्रवाती तूफान Tauktae का शिकार हुए 'वागड़ के देसी आम', आंसू बहा रहे मजबूर किसान
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Dunagrpur: जिले में कोरोना काल (Corona Time) ने हर आम से लेकर खास की कमर तोड़ दी है तो वहीं किसान इस महामारी का सबसे बड़ा शिकार हुआ है. कोरोना के बाद अब चक्रवाती तूफान ने मीठे और रसीले देसी आम की फसल को चौपट कर दिया है, जिससे आम के उत्पादन से उम्मीद लगाकर बैठे किसानों की कमर टूट गई है और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. 

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फलों का राजा आम की बात हो और वागड़ के देसी आम की बात नहीं हो, ऐसा हो नहीं सकता है. वागड़ के देसी आम का स्वाद जब एक बार किसी की जुबान पर लग जाए तो फिर वह उसे कभी भूल नहीं सकता है और वह देसी आम का मुरीद हो जाता है. 

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आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में देसी आम के असंख्य पेड़ हैं तो कई लोगों ने आम के पेड़ों से ही सालभर में एक बार कमाई होती है. गर्मी का मौसम आने के साथ ही इस बार आम की अच्छी पैदावार की उम्मीद हर किसी को थी लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का फल मिलता, उससे पहले ही ताऊते चक्रवात में उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. चक्रवात की तेज आंधी ने हजारों आम के पेड़ से आम के फल गिर गए. आम के फल से लदे हजारों पेड़ एक तूफान ने झकझोर कर रख दिया और सभी आम के पेड़ से आम जमीन पर गिर गए. ऐसे में आम की पैदावार बेचकर किसानों ने जो उम्मीदें पाली थी वह भी पूरी तरह से खत्म हो गई.

राजस्थान के इन जिलों में होती है वागड़ की बहार
वागड़ खासकर डूंगरपुर, बांसवाड़ा प्रतापगढ़ में देसी आम की बहार रहती है. यहां के आम रसीले और मीठे होते हैं, जिस कारण यहां के आमों की डिमांड ज्यादा रहती हैं. इन आमों को चूसने के लिए या फिर जूस के लिए भी इस्तेमाल होता है. वहीं आम का अचार या मुरब्बा भी बनाया जाता है. सुरपुर निवासी किसान बताते हैं कि यहां का आम शहद की तरह मीठा और कुछ खट्टा होता है, जिस कारण लोग इसे चाव से खाते हैं. वहीं, जूस में शक्कर की जरूरत भी बहुत कम रहती है. लेकिन इस बार एक रात के तूफान ने उनकी पैदावार को नष्ट कर दिया है. 

क्या कहना है किसानों का
पीड़ित किसान बताते हैं कि खेतों में करीब 45 आम के पेड़ हैं, जिससे हर साल करीब 3 से 4 लाख रुपये की आमदनी होती है और इसे बेचकर सालभर अपना व परिवार का गुजारा चलाते हैं. इस बार आम के पेड़ों पर अच्छे आम लगे थे, जिससे इस बार भी उतनी ही कमाई की उम्मीद थी लेकिन कुछ घंटों के लिए आए तूफान में उनकी आम के उत्पादन को ही बर्बाद कर दिया. तेज आंधी के कारण पेड़ों से सारे आम जमीन पर गिर गए, जिससे आप टूट-फूट गए. अब खराब हो चुके आम को कोई फल व्यापारी भी लेने को तैयार नहीं है. ऐसे में उन्हें लाखों रुपए का भारी नुकसान हुआ है. 

किसानों को आर्थिक हालत कैसे सुधरेगी
बहरहाल, देसी आम की पैदावार से कोरोना के संकट में किसानों को आर्थिक हालात को सुधारने की उम्मीद थी. किसान आम के फल से सालभर की आर्थिक तंगी को दूर करने का इंतजार कर रहा था लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का फल मिलता उससे पहले ही ताऊते चक्रवात में उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. अब किसानों के सामने कुदरत के इस कहर के आगे आंसू बहाने के सिवा कुछ नहीं बचा है. 

Reporter- Akhilesh Sharma