झांतला माता के दरबार में रोग होते हैं दूर, मां करती हैं हर मनोकामना पूर्ण

जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर झांतला माता का मंदिर स्थित है. यहां की मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से लकवा रोगी ठीक हो जाता है.

झांतला माता के दरबार में रोग होते हैं दूर, मां करती हैं हर मनोकामना पूर्ण
झांतला माता.

Chittorgarh: आमतौर पर लकवा रोगी चिकित्सकों का सहारा लेकर अपनी बिमारी को दूर करने का प्रयास करते है लेकिन मेवाड़ के शक्तिपीठों में चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh News) की झांतला माता (Jhantala Mata) ऐसा स्थान हैं, जहां के न केवल प्रदेश से बल्कि दूर दराज के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लकवा रोगी पहुंचकर रोग मुक्त हो जाते है. 

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जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर झांतला माता का मंदिर स्थित है. यहां की मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से लकवा रोगी ठीक हो जाता है. वर्षो पुराने माता के मंदिर में इस तरह के चमत्कार की गाथा दूर-दूर तक फैली हुई है. इसके चलते यहां वर्षभर लकवा रोगियों की भीड़ देखने को मिलती है.

वहीं, खास तौर पर शारदीय और चैत्र नवरात्रि में हजारों लोग नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक माता के दरबार में श्रद्धालु और लकवा रोगी यहां आकर स्वयं को धन्य होने की अनुभुति करते हैं. 

अधिकांश लोगों की मान्यता है कि लकवा रोगियों को मन्दिर परिसर में रात्रि विश्राम कराने के साथ ही समीपस्थ वटवृक्ष की परिक्रमा कराने से निश्चय ही लाभ होता है. इसी भावना के अनुरूप बड़ी संख्या में लकवा रोगी और उनके परिजन इस नवरात्रि में भी झांतला रानी की शरण में रहते हैं. 

कई श्रद्धालु रोगी मुक्ति के बाद मुर्गें का उतारा कर मन्दिर परिसर में उसे छोड़ देते है. वहीं, कई भक्त यहां महाप्रसादी का आयोजन करते है. रोगियों के अलावा बड़ी संख्या में अन्य श्रद्धालु भी झांतला माता के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में नवरात्रि के दिनों में पहुंचते है. 

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आज के इस आधुनिक और वैज्ञानिक युग में चिकित्सक लकवा (Paralysis) रोगियों का उपचार करने में महीनों लगा देते है. वहीं, झांतला माता के दर्शन मात्र से लकवे का रोग दूर हो जाना एक चमत्कार ही कहा जा सकता है. 

Reporter- Deepak Vyas