अनाथ बच्चों को लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा Dungarpur का राजकीय शिशु गृह

राजकीय शिशु गृह से अब तक 36 बच्चों को विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर गोद दिया गया है और वे शिक्षित परिवारों के घर के चिराग बन चुके हैं. वहीं, शिशु गृह में पल रहे 5 बच्चों को अब नए परिवार का इंतजार है. 

अनाथ बच्चों को लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा Dungarpur का राजकीय शिशु गृह
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Dungarpur: पारिवारिक और सामाजिक मजबूरियों के चलते कई बार मां अपने कलेजे के टुकड़ों को लावारिस हालात में छोड़कर चली जाती है लेकिन डूंगरपुर (Dungarpur) जिले में ऐसे बच्चों को बाल अधिकारिता विभाग (Child Empowerment Department) के माध्यम से संचालित राजकीय शिशु गृह नया जीवन दे रहे हैं. 

राजकीय शिशु गृह से अब तक 36 बच्चों को विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर गोद दिया गया है और वे शिक्षित परिवारों के घर के चिराग बन चुके हैं. वहीं, शिशु गृह में पल रहे 5 बच्चों को अब नए परिवार का इंतजार है. 

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डूंगरपुर जिले का राजकीय शिशु गृह, जिसकी शुरुआत राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2013 में की गई थी. इसके तहत कई जगह पर पालने लगाए गए ताकि लोग बच्चों को असुरक्षित छोड़ने के बजाय पालनों में सुरक्षित छोड़े. इन पालनों में आने वाले बच्चों की परवरिश के लिए बाल अधिकारिता विभाग के माध्यम राजकीय शिशु गृह संचालित किया जा रहा है. पालनगृह और अन्यत्र लावारिस मिलने वाले नवजातों को पहले अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है, जहां पर शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बाद बच्चे को शिशुगृह में लाया जाता है. शिशु गृह में प्रवेश के बाद बच्चों का आया द्वारा एक मां की तरह लालन-पोषण किया जाता है. 

वहीं, दत्तक देने की प्रक्रिया से पहले शिशु गृह में इन बच्चों का पूरा ध्यान रखा जाता है. डूंगरपुर जिले के राजकीय शिशु गृह से अब तक 36 बच्चों को विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर गोद दिया गया है. वहीं, वर्तमान में 5 नवजात बच्चियां शिशु गृह में मौजूद है, जिनकी दत्तक प्रक्रिया चल रही है. शिशु गृह में आए बच्चों की बात करें तो जिले में शिशु गृह के संचालन से लेकर अब तक 47 बेसहारा शिशु आए हैं. इसमें में झाड़ियो व अन्य स्थानों पर मिले 6 नवजातो की कंडीशन ख़राब होने से मौत हो चुकी है. वहीं, 18 लड़कियों सहित 36 शिशुओ को बे औलाद दम्पत्ति को गोद देते हुए संतान सुख दिलाया है. 

बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक लोहित आमेटा ने बताया कि अभी तक एनआरआई फेमेली के अलावा प्रशासनिक अधिकारी से लेकर व्यापारी, इंजीनियर और डॉक्टर जैसे परिवारों में बच्चों को गोद दिया गया है. वहीं, उन्होंने बताया कि गोद दिए जाने के बाद भी विभाग उन बच्चों की मॉनिटरिंग करता है और उनका फॉलोअप लेता है.

6 नवजातों की मौत भी हो चुकी 
इधर डूंगरपुर जिले में राज्य सरकार (State Government) की ओर से लावारिस बच्चों को सुरक्षित छोड़ने के लिए पालनाग्रहों की व्यवस्था के बावजूद कई लोग नन्हें फूलों को झाड़ियों में कांटों के हवाले कर देते हैं. आंख खोलते ही जीवन संघर्ष का पहला सबक कई नवजात झेल भी नहीं पाते हैं. यही कारण है कि झाड़ियों में फेंके गए ऐसे 6 नवजातों की मौत भी हो चुकी है. ऐसे में विभाग के साथ ज़ी मीडिया लोगों से अपील करता है कि अवांछित शिशुओं को झाड़ियों में नहीं फेक कर पालने में सुरक्षित छोड़े ताकि उनका जीवन बचाते हुए उन्हें किसी अन्य जरुरतमन्द परिवार का चिराग बनाया जा सके.

Reporter- Akhilesh Sharma