राजस्थान में है 'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया', मजबूती में चीन की दीवार को भी देता है टक्कर

Rajasthan Tourism: राजस्थान का कुंभलगढ़ किला अपनी 36 किलोमीटर लंबी दीवार के लिए मशहूर है, जो चीन की ग्रेट वॉल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार है. इसकी भव्यता और मजबूती ने इसे विश्व धरोहर बनाया है.

राजस्थान में है 'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया', मजबूती में चीन की दीवार को भी देता है टक्कर

Rajasthan News: राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत, शिल्प कला और स्थापत्य में विश्व प्रसिद्ध पहचान है, और इसी विरासत का एक गौरवपूर्ण प्रतीक है कुंभलगढ़ दुर्ग. यह किला न केवल अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि इसकी मजबूत दीवारें और स्थापत्य संरचना इसे दुनिया के चुनिंदा अभेद्य किलों की सूची में शुमार करती हैं.

उदयपुर से लगभग 84 किलोमीटर उत्तर में स्थित यह किला घने जंगलों के बीच बसा है. इसका निर्माण मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा ने 13 मई 1459 को करवाया था. महाराणा कुंभा ने इसे बाहरी आक्रमणों से अपनी प्रजा की सुरक्षा हेतु बनवाया था. यही कारण है कि इस किले की दीवारों को अत्यधिक मजबूत बनाया गया.

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कुंभलगढ़ की दीवारें लगभग 36 किलोमीटर लंबी हैं, जो इसे चीन की ग्रेट वॉल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दीवार बनाती हैं. इस दीवार की चौड़ाई इतनी है कि इस पर एक साथ आठ घोड़े दौड़ सकते हैं. इस किले की दीवारें इसकी सबसे बड़ी विशेषता हैं, और इन्हीं के कारण इसे 'भारत की ग्रेट वॉल' भी कहा जाता है.

कुंभलगढ़ दुर्ग को 'मेवाड़ की आंख' भी कहा जाता है. इस दुर्ग में 60 से अधिक हिंदू और जैन मंदिर हैं, जो इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं. किले के भीतर बने ‘कुंवर पृथ्वीराज की छतरी’ और 'उड़ता राजकुमार' की कथा इस किले को और भी रोमांचक बनाती है.

इतिहास में यह किला मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप की जन्मस्थली भी रहा है. जब बनबीर ने विक्रमादित्य की हत्या कर गद्दी हड़प ली थी, तब कुंभलगढ़ ही बालक उदयसिंह की शरणस्थली बना था.

यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में शामिल कुंभलगढ़ दुर्ग राजस्थान की शौर्यगाथा और स्थापत्य का अद्वितीय उदाहरण है. यह न केवल पर्यटकों को आकर्षित करता है, बल्कि गौरवशाली इतिहास को जीवंत करता है.

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