Rajasthan News: प्रतापगढ़ की पहाड़ियों और जंगलों से आई एक उम्मीद भरी तस्वीर. यहां पर संकटग्रस्त प्रजाति की भी संख्या बढ़ रही है. क्या यह खबर प्रकृति के द्वारा खुद को रिसेट करने का इशारा है या कुछ और.
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Pratapgarh News: क्या वाकई जंगल लौट रहे हैं जीवन की ओर? प्रतापगढ़ की पहाड़ियों और जंगलों से आई एक उम्मीद भरी तस्वीर, जहां पेंगोलियन जैसी संकटग्रस्त प्रजाति की संख्या 3 से बढ़कर 36 हो गई है, वहीं पैंथर की मौजूदगी भी बढ़ी है. कुल 6640 वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज, क्या ये आंकड़े बता रहे हैं कि प्रकृति खुद को रीसेट कर रही है? या ये हैं स्थानीय संरक्षण प्रयासों का असर? हम लेकर आए हैं वो आंकड़े, जो सिर्फ गिनती नहीं, बल्कि एक नई कहानी है.
वन्य जीव गणना
जिले में 11-12 जून को हुई वन्य जीव गणना ने जैव विविधता और संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियों की तस्वीर सामने रखी है. जिले की छह रेंज प्रतापगढ़, देवगढ़, धरियावद, बांसी, छोटीसादड़ी और पीपलखूंट में कराई गई इस गणना में कुल 6440 वन्य जीव दर्ज किए गए.
क्या बोले उप वन संरक्षक हरिकिशन सारस्वत?
उप वन संरक्षक हरिकिशन सारस्वत ने बताया कि यह संख्या 2022 में 4967 और 2024 में 5755 थी, जिससे साफ होता है कि पिछले कुछ वर्षों में वन्य जीव के संरक्षण में निरंतर सुधार हो रहा है. पेंगोलियन 3 से बढ़कर 36 और पैंथर 17 से 20 हो गए. इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रतापगढ़ में वन्यजीवों के आवास और उनकी सुरक्षा को लेकर निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं. गणना के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह सामने आता है कि कई प्रमुख और दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में वृद्धि हुई है. पैंथर की संख्या 2022 में 7 थी, जो 2024 में 17 और 2025 में 20 हो गई. इसी प्रकार सियार की संख्या 380 से बढ़कर 510 हो गई है. नीलगाय 917 से घटकर 713, जंगली सुअर 234 से बढ़कर 394, लंगूर 2295 से बढ़कर 2885 हो गए. जैसे शाकाहारी जीवों की भी बढ़ती आबादी यह दर्शाती है कि खाद्य श्रृंखला भी मजबूत हो रही है, जिससे शिकारी प्रजातियों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो रहा है.
पेंगोलियन की उपस्थिति
गणना में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही पेंगोलियन की उपस्थिति. वर्ष 2022 में केवल 3 पेंगोलियन दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या 36 तक पहुंच गई है. पेंगोलियन एक संकटग्रस्त प्रजाति है, जिसका अक्सर अवैध शिकार किया जाता है. इसकी उपस्थिति स्पष्ट रूप से संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है. रस्टी बिल्ली, बिज्जू जैसी कम दिखने वाली प्रजातियों की उपस्थिति से यह साबित होता है कि जैव विविधता में न केवल विविधता बनी हुई है, बल्कि उसमें वृद्धि भी हो रही है. पक्षियों में मोर की संख्या 976 से बढ़कर 1067 हो गई है, जबकि जंगली मुर्गे अब 452 की संख्या में दर्ज हुए हैं. गणना में जल जीवों की स्थिति भी आशाजनक दिखी. मगरमच्छ की संख्या 2022 में 2 थी, जो 2025 में बढ़कर 5 हो गई है. यह स्थानीय जल तंत्र की स्थिरता और शुद्धता का सूचक है. वर्ष 2015 से अब तक कुल सात बार वन्यजीव गणना की जा चुकी है. हालांकि 2016 और 2017 में कुछ गिरावट देखने को मिली थी और 2021 व 2023 में गणना संभव नहीं हो सकी थी.
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