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Pratapgarh News: सोशल मीडिया अब अपराध को ग्लैमराइज करने का नया जरिया बन चुका है. इंस्टाग्राम पर 'बबलू स्टार 09' नाम की आईडी इन दिनों अपराध की दुनिया का बड़ा शोकेस बनी हुई है. इस अकाउंट पर युवक नोटों के बंडल लहराते हुए न केवल खुद को बड़ा तस्कर बताता है, बल्कि खुलेआम अफीम और डोडा चूरा की सप्लाई का दावा करता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह पुलिस को खुली चुनौती देते हुए कहता है, कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
इस आईडी पर दो लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और हर दिन हजारों लोग उसके वीडियो देखते हैं. इन वीडियोज में वह तस्करी के फायदे गिनाकर युवाओं को अपराध की राह पर ले जाने का प्रयास करता है. हैरानी की बात यह है कि इतने वायरल वीडियो और खुले अपराधी दावों के बावजूद अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है.
बबलू स्टार 09 सिर्फ तस्करी को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि खुद को मददगार भी बताने की कोशिश करता है. उसके कुछ क्लिप्स में दिखाया गया है- तीन हजार डाल दो, कॉलेज का फॉर्म भरना है और फिर वह कहता है भैया चेक करो, पैसे भी डाल दिए. यह विरोधाभासी संदेश युवाओं के लिए बेहद खतरनाक है. एक और वह अपराध से रुतबा और पैसा दिखाता है, दूसरी ओर मददगार बनने का नाटक करता है.
लव यू इंस्टा फैमिली, 200K फॉलोअर्स कंप्लीट जैसे पोस्ट्स उसके बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता को उजागर करते हैं. यही नहीं, चित्तौड़गढ़ से मनीपुर गांव तक माल सप्लाई जैसे वीडियो में वह अपने नेटवर्क और तस्करी का रॉब झाड़ता है. यह सब मिलकर सोशल मीडिया पर एक वर्चुअल दबदबा बनाने का काम कर रहा है.
यह पहली बार नहीं है, जब सोशल मीडिया अपराध का मंच बना हो. मध्यप्रदेश के उज्जैन का दुर्लभ कश्यप भी सोशल मीडिया के जरिए अपराध जगत में नाम कमाने की कोशिश कर चुका है. वह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर खुलेआम हथियार, गैंग और धमकियों से भरे वीडियो पोस्ट करता था. युवाओं में उसकी फॉलोइंग तेजी से बढ़ी और उसने गैंगस्टर इमेज बना ली लेकिन यह वर्चुअल दबदबा ज्यादा दिन नहीं चला. पुलिस और प्रतिद्वंद्वी गैंग की नजरों में आने के बाद 2020 में एक गैंगवार में उसकी हत्या हो गई.
जिस अपराधी छवि ने उसे सोशल मीडिया पर पहचान दी, वही उसके अंत का कारण बनी. बबलू स्टार 09 का मामला इस बात का ताजा सबूत है कि कैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अपराध को बढ़ावा देने और उसे आकर्षक रूप में पेश करने का जरिया बनते जा रहे हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि लाखों युवाओं तक तस्करी और अपराध का संदेश फैलाने वाले इन वर्चुअल अपराधियों पर कब और कैसी कार्रवाई होगी?
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