Pratapgarh News: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के नानना गांव के के 61 बच्चे जर्जर सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. ऐसे में बच्चे मौत के डर से साए में पढ़ रहे हैं. यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
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Pratapgarh News: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के नानना गांव के 61 बच्चे आज भी जर्जर और खस्ताहाल भवनों में अपनी पढ़ाई करने को मजबूर हैं. गांव का सरकारी स्कूल किसी हादसे से कम नहीं दिखता. तीनों कक्षाओं के भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, वहीं पास की आंगनबाड़ी भी टूट-फूट की कगार पर है.
हालात इतने खराब हैं कि बच्चों और अभिभावकों के सिर पर हमेशा मौत का साया मंडराता रहता है. ग्रामीण युवराज सिंह और शाहिद खान ने बताया कि कई बार शासन-प्रशासन को स्कूल की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पीडब्ल्यूडी के अधिकारी निरीक्षण कर केवल रस्सी और चेतावनी का कागज चिपकाकर लौट गए.
कक्षाओं के बाहर नोटिस लगा दिया गया कि भवन क्षतिग्रस्त है, भीतर न बैठें लेकिन सवाल यह है कि जब पढ़ाई ही नहीं हो पाएगी तो बच्चे कहां जाएं? ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में तो बच्चों को स्कूल से छुट्टी कर दी जाती है, क्योंकि बैठने के लिए सुरक्षित जगह ही नहीं बचती.
शिक्षा का अधिकार कागजों पर भले ही मौजूद हो, लेकिन नानना गांव के मासूमों के लिए यह हक सिर्फ एक सपना बनकर रह गया है. वार्ड पंच राजेश ने भी स्वीकार किया कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा. न केवल स्कूल बल्कि गांव तक पहुंचने वाला 3 किलोमीटर लंबा मार्ग भी पूरी तरह से खराब है. इससे बच्चों और ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
गांव के लोगों का कहना है कि न तो जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न ही प्रशासन. इस उपेक्षा से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. उनका कहना है कि यदि समय रहते स्कूल भवन की मरम्मत नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
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