Rajasthan News: उदयपुर के सेंट एंथोनी स्कूल में खेल के दौरान गोलपोस्ट गिरने से 8 साल के छात्र की मौत ने प्रदेश को झकझोर दिया. मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाते हुए सभी स्कूलों में खेल उपकरणों की जांच के आदेश दिए और अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी.
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Udaipur School Accident: राजस्थान के उदयपुर में एक निजी स्कूल में खेल के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. गोलपोस्ट गिरने से एक मासूम छात्र की मौत के बाद अब राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने सभी स्कूलों में खेल मैदान, उपकरण, पोल, जालियां और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच के आदेश दिए गए हैं. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से रिपोर्ट भी तलब की गई है. सवाल ये है? कि क्या स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?
उदयपुर के सेंट एंथोनी स्कूल में खेलते समय गोलपोस्ट गिरने से आठ वर्षीय छात्र की जान चली गई. इस दर्दनाक घटना के बाद राज्य स्तर पर हलचल तेज हो गई है. राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, पुलिस और संभागीय आयुक्त को नोटिस जारी किए हैं.
आयोग के मुताबिक छात्र खेल अवधि के दौरान मैदान में मौजूद था. इसी दौरान वहां लगा पोल या गोलपोस्ट अचानक गिर गया. हादसा इतना गंभीर था कि छात्र की मौके पर ही मौत हो गई. मासूम की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं . क्या खेल उपकरणों की समय-समय पर जांच होती है? क्या स्कूल प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था? और सबसे बड़ा सवाल- क्या बच्चों की जान से बड़ा कोई भी प्रशासनिक ढीलापन हो सकता है?
घटना के बाद मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि-
सभी स्कूल परिसरों में लगे खेल उपकरणों की जांच हो.
पोल, जालियां, खंभे, गोलपोस्ट, बास्केटबॉल स्टैंड जैसे उपकरण सुरक्षित हों.
खेल अवधि के दौरान निगरानी सुनिश्चित की जाए.
जिला प्रशासन संयुक्त निरीक्षण करे.
घटना की विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित तिथि तक भेजी जाए.
आयोग ने जिला कलेक्टर उदयपुर, माध्यमिक शिक्षा निदेशक, प्राथमिक शिक्षा निदेशक, पुलिस अधीक्षक और संभागीय आयुक्त से जवाब मांगा है.
इस घटना के बाद निजी स्कूलों के कई अभिभावकों में भी नाराजगी है. कई माता-पिता का कहना है कि वे फीस तो समय पर भरते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर स्कूलों में कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती. उनका कहना है कि “हम बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, जान जोखिम में डालने नहीं.” “हर स्कूल में सुरक्षा ऑडिट जरूरी होना चाहिए.” “जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.”
इधर शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल सुरक्षा सिर्फ सीसीटीवी लगाने तक सीमित नहीं हो सकती. खेल मैदान, लैब, बस, सीढ़ियां, बिजली कनेक्शन, फर्नीचर- हर क्षेत्र में नियमित ऑडिट जरूरी है. स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि खेल उपकरणों की फिटनेस चेकिंग उतनी ही जरूरी है जितनी किसी मशीन की सर्विसिंग. हर हादसे के बाद जांच, हर मौत के बाद आदेश, हर लापरवाही के बाद नोटिस, लेकिन क्या बच्चों की सुरक्षा के लिए सिस्टम को किसी हादसे का इंतजार करना चाहिए?
क्या स्कूलों में सालाना नहीं, मासिक सुरक्षा निरीक्षण होना चाहिए? क्या निजी और सरकारी सभी स्कूलों के लिए एक समान सुरक्षा नियम लागू होने चाहिए. उदयपुर की इस घटना ने सिर्फ एक परिवार से उनका बच्चा नहीं छीना. बल्कि पूरे सिस्टम की कमियों को सामने ला दिया है. अब देखना होगा कि आदेश फाइलों तक सीमित रहते हैं या स्कूलों के मैदान सच में सुरक्षित बनते हैं.
बच्चों की सुरक्षा किसी भी व्यवस्था की पहली जिम्मेदारी है. अगर स्कूल ही सुरक्षित नहीं होंगे तो भविष्य कैसे सुरक्षित होगा? फिलहाल इस मामले पर नजर बनी हुई है. इधर मानवाधिकार आयोग में मामले की अगली सुनवाई 19 मई को रखी गई है.
उदयपुर में स्कूल के खिलाफ लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
उदयपुर के सेंट एंथोनी स्कूल में पोल गिरने से हुई तीसरी कक्षा के छात्र की मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. लापरवाह स्कूल प्रबंधन के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और प्रिंसिपल को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर आज बड़ी संख्या में लोगों ने गोवर्धनविलास थाने का घेराव किया. पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए करनी सेना और सर्व समाज के लोगों के लोगो ने थाने के बाहर जम कर नारेबाजी की. उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल को अविलंब गिरफ्तार करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की आवाज उठाई. पुलिस अधिकारियों ने समजाइश लर प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया. लेकिन वह प्रिंसिपल को गिरफ्तार करने की मांग को लेलर थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ कहा कि जब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा वह थाने के बाहर ही धरने पर बैठे रहेंगे. मामले की गंभीरता को देखते हुए थाने के बाहर अतिरिक्त पुलिस जाता तैनात किया गया. वहीं परिजनों और प्रतिनिधि मंडल के लोगो के साथ पुलिस अधिकारियों की वार्ता का दौर जारी है.
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