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Swarnim Rajasthan Udaipur: राजस्थान का उदयपुर जिला उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ रहा है. इसी कड़ी में आज ज़ी राजस्थान के 'स्वर्णिम राजस्थान' कार्यक्रम का कारवां वीरों की भूमि मेवाड़ की राजधानी उदयपुर में पहुंचा. आज मंगलवार को उदयपुर में ‘स्वर्णिम राजस्थान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में झीलों की नगरी की कई प्रतिष्ठित और प्रभावशाली शख्सियतों को सम्मानित किया गया.
स्वर्णिम राजस्थान उदयपुर में मुख्य अतिथि के रूप में गुलाब चंद कटारिया, पंजाब के महामहिम राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक ने शिरकत की. उनके साथ मन्नालाल रावत, ताराचंद्र जैन और फूलसिंह मीणा भी कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर रघुवीर मीणा उपस्थित हुए. वहीं विशेष अतिथि के रूप में नमित मेहता और योगेश गोयल भी कार्यक्रम की शोभा बने. इस आयोजन के माध्यम से ज़ी राजस्थान ने उदयपुर की उन शख्सियतों को सम्मानित किया, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज और जिले के विकास में विशेष योगदान दिया.
स्वर्णिम राजस्थान उदयपुर कार्यक्रम में सम्मानित होने वाले लोगों के नाम और सम्मान की वजह इस प्रकार हैं-
1. आर्या सिखवाल, वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी
पांच साल की मासूम बच्ची आर्या सिखवाल ने महज ढाई साल की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ा. आर्या सबसे कम उम्र में नेपाल के एवरेस्ट बेस कैम्प तक पहुंचने वाली बच्ची होने के रिकॉर्ड को अपने नाम कर शहर और प्रदेश का नाम दुनिया में रोशन किया. आर्या अपने माता-पिता के साथ 10 दिन में 17598 फिट की चढ़ाई चढ़ कर बेस कैंप पहुंची थी.
2. कियाना परिहार, शतरंज खिलाड़ी
10 साल की कियाना परिहार ने भारतीय शतरंज में नया इतिहास रचते हुए उदयपुर का नाम देश में रोशन किया. कियाना ने महिला कैंडिडेट मास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है. कियाना ने राष्ट्रीय अंडर-9 गल्स चेस चैम्पियनशिप 2024, एशियन यूथ चैम्पियनशिप-2023, वर्ल्ड कैडेट चेस चैम्पियनशिप-2025, में जीत दर्ज कर कई पदक अपने नाम किए हैं.
3. प्रो. चंद्रशेखर शर्मा, विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय
प्रो चन्द्रशेखर शर्मा ने महाराणा प्रताप पर पहली पीएचडी की, अपनी शोाध के दौरान ऐसे एतिहासिक तथ्य जुटाए, जिससे पता चला कि हल्दीघाटी के युद्व में महाराणा प्रताप की सेना ने विजय प्राप्त की थी. इसी के आधार पर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के साथ पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने अपनी पाठ्यपुस्तकों में मेवाड और महाराणा प्रताप से जुडे तथ्यों में बदलाव हुआ. साथ ही हल्दीघाटी क्षेत्र में भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से लगे तीन शिलालेख को हटा कर उसमें सुधार किया गया.
4. संतोष भाटी, वन रक्षक
संतोष भाटी महिलाओं के संघर्ष की जीवन्त कहानी है. पिता ने बोझ समझ कर 14 साल की उम्र में शादी करवा दी. ससुराल वालों की बेरुखी से परेशान हो 2005 में दो बेटियों के साथ आप उदयपुर आ गईं. लोगों के घरों में काम कर बच्चों का पालन पोषण किया. बेटी के साथ एक ही कक्षा में पढ़ाई कर 10वीं पास की. फिर ग्रेजुएशन की. वर्ष 2016 में वन रक्षक भर्ती परीक्षा पास कर सरकारी नॉकरी हासिल की.
5. डॉ. आरएल सुमन, अधीक्षक, राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय
डॉ. आरएल सुमन के कुशल नेतृत्व में राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय के विकास में कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं. अस्पताल को एनएबीएच (नाभ) गुणवत्ता की मान्यता प्राप्त हुई है. हॉस्पिटल में 200 से अधिक आईसीयू बीएड विकसित किए गए. मरीजों की सुविधा के लिए नई क्यूआर कोड फैसिलिटी शुरू की गई. डॉ. सुमन भारत में सिकल सेल एनीमिया के लिए स्थापित पहले सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंसी के नोडल ऑफिसर हैं. वे नवजात शिशु देखभाल, कुपोषण प्रबंधन और मातृ-शिशु पोषण पर मास्टर ट्रेनर भी हैं.
6. डॉ. मुकेश शर्मा, एचओडी, कॉर्डियोलॉजी विभाग, राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय
उदयपुर के राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में उन्हें लगभग 23 वर्षों का शिक्षण और चिकित्सकीय अनुभव प्राप्त है. डॉ. शर्मा ने अब तक चालीस हजार से अधिक हृदय रोग संबंधी जांच एवं इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं की हैं और अनेक डीएम कार्डियोलॉजी छात्रों को प्रशिक्षित किया है. वे लगभग तीस शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं. उनके नेतृत्व में आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विभाग का उल्लेखनीय विकास हुआ है, जिसमें नई डीएम सीटें, आधुनिक आईसीयू, उन्नत तकनीक और विशेष उपचार सेवाएं शुरू की गईं.
7. श्रद्धा मुर्डिया, फाउंडर, कस्ती फाउंडेशन
कस्ती फाउंडेशन की फाउंडर श्रद्धा मुर्डिया बीते एक दशक से ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वालों बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर प्रयासरत है. स्कूल्स में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर बच्चों को मोटिवेट किया जा रहा है. साथ ही उनमें शिक्षा के साथ, कला और खेल से जोड़ने का भी काम किया जा रहा है.
8. डॉ. सुनील कुमार, पल्मोनोलॉजिस्ट, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एन्ड हॉस्पिटल, उदयपुर
डॉ. सुनील कुमार राजस्थान के विख्यात पल्मोनोलॉजिस्ट हैं, उन्हें श्वसन रोगों के व्यापक निदान एवं उपचार में गहरा अनुभव है. वह जटिल अस्थमा और इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़ के उपचार में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं. उन्नत एवं न्यूनतम इनवेसिव श्वसन प्रक्रियाओ में दक्ष हैं. डॉ. कुमार ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं में अनेक शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं, जो उनकी साक्ष्य आधारित चिकित्सा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.
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