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Udaipur News: Udaipur News: उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय कुलगुरु द्वारा औरंगजेब को कुशल प्रशासक बनाने के बाद शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. यह विवाद अब विश्वविद्यालय कैंपस से बाहर निकल चुका है. ईसी को लेकर आज बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया.
प्रदर्शनकारी वकीलों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सोप कुलगुरु प्रोफेसर मिश्रा को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग की. उन्होंने कहा कि समय रहते सरकार कुलगुरु प्रो मिश्रा को समय पर हटा दे नहीं तो आने वाले समय में मेवाड़ की जनता उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगी.
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को जिला कलेक्टर को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में उन्होंने कुलगुरु प्रो. मिश्रा को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रो. मिश्रा की नियुक्ति उनके 'बैकग्राउंड और योग्यता' के आधार पर नहीं हुई है, जिससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक और बौद्धिक वातावरण प्रभावित हो रहा है.
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब प्रो. मिश्रा ने मुगल शासक औरंगजेब को 'कुशल प्रशासक' बताया. उनके इस बयान को लेकर छात्र संगठनों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के एक वर्ग में आक्रोश फैल गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्था है, जहां इतिहास को तथ्यों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए, न कि वैचारिक दृष्टिकोण से.
बार एसोसिएशन के पदाधिकारी ने कहा कि विश्वविद्यालय के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति को निष्पक्ष, योग्य और प्रेरणादायक होना चाहिए. अगर कुलगुरु खुद विवादों में घिरी होंगी, तो छात्रों और शिक्षकों पर उसका गलत प्रभाव पड़ेगा. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राज्यपाल इस मामले में हस्तक्षेप कर कुलगुरु को तत्काल पद से हटाएं और नियुक्ति की जांच करवाएं.
वहीं, मंगलवार देर रात छात्रों ने कुलगुरु के चैंबर को ताला लगाकर उन्हें करीब छह घंटे तक भीतर बंद रखा. इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा.
मंगलवार शाम शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ने देर रात उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद प्रो. मिश्रा को पुलिस सुरक्षा में उनके चैंबर से बाहर निकाला गया. छात्रों का आरोप है कि प्रो. मिश्रा ने अपने बयान में मुगल शासक औरंगजेब को 'कुशल प्रशासक' बताया था, जो ऐतिहासिक तथ्यों और देश की भावनाओं के विपरीत हैं.
घंटों चले गतिरोध के बाद देर रात छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत यह तय किया गया कि जब तक विवाद की जांच नहीं होती, प्रोफेसर मिश्रा विश्वविद्यालय नहीं आएंगी. हालांकि, छात्रों ने यह साफ कर दिया है कि जब तक प्रो मिश्रा को पद से हटाया नहीं जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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