Udaipur News: उदयपुर के व्यवसायी मनोज आंचलिया ने आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए गुमनाम वीरों के नामों को एक जगह संकलित करने का बीड़ा उठाया है. मनोज ने अब तक 21,000 फीट लंबे कपड़े पर हजारों गुमनाम शहीदों के नाम अंकित किए हैं.
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Udaipur News: भारत माता को गुलामी की बेड़ियो से मुक्त करवाने के लिए आजदी की जंग में लाखों वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी. इतिहास के पन्नों पर इन गुमनाम वीर योद्धाओं की गाथा का जिक्र कम मिलता है. ऐसा ही सवाल करीब ढाई दशक पहले उदयपुर के मनोज आंचलिया के मन में भी आया. इसके बाद उन्होंने इन गुमनाम शहीदों के नाम को एक ही स्थान पर संकलित करने का बीड़ा उठाया. अपने अथक प्रयास से अब तक वे हजारों शहीदों के नाम कपड़े पर उकेर चुके हैं.
विनायक देशपांडे, शशांक विमल, सीताराम राजू, सेनापति बापट, दिनेश गुप्ता और बादल गुप्ता ऐसे हजारों-लाखों नाम उन गुमनाम शाहिदों के है, जिनको ना ही इतिहास के पन्नों में जगह मिली, ना ही आज कोई उनके बारे में कोई जानता है. इन्ही लाखों शहीदों की शहादत के कारण आज हम आजादी का जश्न मना रहे हैं.
ऐसे हजारों गमनाम शहीदों ने नामो को एक स्थान संकलित करने का बीड़ा उदयपुर के मनोज आंचलिया ने उठाया. पेशे से व्यवसाय मनोज अंचलिया ने बताया कि उनके मन में बार बार यह सवाल उठता था कि किताबों में जिनके बारे में पढ़ाया जाता है, क्या उन्होंने ही आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व बिलिदान किया. वे लाखों योद्धा कौन-कौन है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी लेकिन उनका जिक्र कहीं नहीं.
ऐसे में वर्ष 2000 में उन्होंने गुमनाम शहीदों के नामो को खोजने और उन्हें एक ही स्थान पर संकलित करने का काम शुरू किया. अपने व्यवसाय के सिलसिले में जब वह मेट्रो सिटी में जाते, तो वहां फुटपाथ पर लगी किताबों की स्टॉल और लाइब्रेरी में जाकर अध्ययन करते. लोगों से बाते करते और ऐसे वीर योद्धाओं के बारे में जानकारी लेते, जिन्होंने आजादी के जंग में अपने प्राणों की आहुति दी.
पहले तो वह एक डायरी में उन शहीदों के नाम और उनके गौरव गाथाओं को लिखते थे, लेकिन जैसे-जैसे संख्या बढ़ती गई उन्होंने इसे एक ही स्थान पर लिखने का काम शुरू किया ताकि वे लोगों तक इन नाम को पहुंचा सकें. इसके बाद मनोज आंचलिया ने पहले कागज और फिर कपड़े पर इन गुमनाम शहीदों के नाम को लिखने की शुरुआत की. ढाई दशक से अपने सफर में वह अब तक 21000 फीट लंबे कपड़े पर देश की हजारों गुमनाम शहीदों के नाम अंकित कर चुके हैं. वीर शहीदों के नाम के संकलन के उनके प्रयास को अलग-अलग रिकॉर्ड बुक में भी स्थान मिला है. अब तक वह 90 से ज्यादा रिकॉर्ड बुक में वे अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं.
गुमनाम शहीदों को के नाम को एक जगह संकलित करने के इस मिशन से वर्ष 2007 में सीमा वेध भी मनोज के साथ जुड़ गई. इस पुनीत कार्य में उन्होंने हर परिस्थिति में मनोज की मदद करने का बीड़ा उठाया. सीमा ने बताया कि कपड़े के ऊपर नाम लिखना आसान नहीं है. उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मार्कर से कपड़े पर लिखते समय केमिकल से उनकी आंखों में जलन होने लगती है. अब तक 21000 फीट लंबे कपड़े पर नाम लिखने के लिए वे 20000 से अधिक मार्कर पेन का उपयोग कर चुके हैं.
मनोज आचार्य और सीमा वेध का यह प्रयास बेहद सराहनीय है, जिसने हजारों वीर योद्धाओं के नाम को एक स्थान पर संकलित किया है. वे चाहते है कि सरकार उनकी मदद करे और वे आम लोगों के बीच इन नामों का प्रदर्शित कर पाएं ताकि आजदी के जंग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन गुमनाम योद्धाओं के बारे में लोग जान पाए.
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