जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में चर्चा का विषय बना दिव्यांग मोहिनी का स्टॉल, जानें हुनर की कहानी

मोहिनी अपनी जरूरतमंद चीजों का खर्चा खुद पेंटिंग बनाकर उठाती हैं. मोहिनी ने बताया कि लिटरेचर फेस्टिवल के माध्यम से यहां एक स्टॉल लगाई गई है, जिसमें वह लाइव पेंटिंग बनाकर अपना व्यवसाय कर रही हैं.

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में चर्चा का विषय बना दिव्यांग मोहिनी का स्टॉल, जानें हुनर की कहानी
मोहिनी अपनी जरूरतमंद चीजों का खर्चा खुद पेंटिंग बनाकर उठाती हैं.

जयपुर: मन में दृढ़ इच्छा शक्ति और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान हो जाता है. ऐसा ही कुछ नजारा ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में देखने को मिला. 23 साल की मोहिनी ने दोनों हाथों से दिव्यांग होते हुए भी हार नहीं मानी और जमाने को हराते हुए खुद आगे निकल गई.

जी हां, कुछ ऐसा ही कारनामा 23 साल की नागपुर निवासी मोहिनी कर रही हैं. एक ट्रेन एक्सीडेंट में मोहिनी के दोनों हाथ कोहनी तक कट गए. फिर भी मोहिनी ने हार नहीं मानी और स्कूली शिक्षा ग्रहण करने के बाद यूनिवर्सिटी से बीटेक किया. अब आईएएस बनने की तैयारी कर रही हैं. 

मोहिनी अपनी जरूरतमंद चीजों का खर्चा खुद पेंटिंग बनाकर उठाती हैं. मोहिनी ने बताया कि लिटरेचर फेस्टिवल के माध्यम से यहां एक स्टॉल लगाई गई है, जिसमें वह लाइव पेंटिंग बनाकर अपना व्यवसाय कर रही हैं.

क्या कहना है मोहिनी की मां का
वहीं, मोहिनी की मां ने बताया एक्सीडेंट के बाद बेटी को देखकर दुख तो बहुत हुआ लेकिन हम लाचार और बेबस थे. कुछ कर नहीं सकते थे. वहीं से सीख लेते हुए मोहिनी को बचपन से ही आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया. इसके चलते वहिनी बचपन से ही अपने सभी काम खुद करने लगी और आज वह पूरी तरीके से आत्मनिर्भर है. 

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मोहिनी की मां ने बताया शुरुआती दौर में मोहिनी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन फिर धीरे-धीरे हर चीज उसकी आदत में आती गई. इसकी बदौलत आज वहिनी अपने पैरों पर खड़े होकर खुद का जीवन संवार रही है. 
किसी को भी जीवन में हार नहीं माननी चाहिए. ऐसी ही कुछ मिसाल इन्होंने समाज के सामने पेश की. समाज को ऐसे लोगों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, जिससे दिव्यांग बच्चों का भविष्य सुंदर बन सके.  

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