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देश में है एक अनूठा बैं‍ड, इसमें जेल के कैदी बजाते हैं बाजा, गाते हैं गाने

आप भी इस बैंड के बारे में जानकर हैरत में हो जाएंगे जब संगीन अपराधों में शामिल रहने के बाद सजा काट रहे है कैदी आपको शादी के मौके पर खुशियां बांटते दिखेंगे.

देश में है एक अनूठा बैं‍ड, इसमें जेल के कैदी बजाते हैं बाजा, गाते हैं गाने
इस बैंड की मार्केट में काफी डिमांड है. (फाइल फोटो)

भवानी भाटी, जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर जेल में शादी के बैंड की बुकिंग होती है. शादी के इस अनूठे बैंड में शामिल रहने बैंड वादक इसी जेल में सजा काट रहे हैं. जोधपुर जेल के इस बैंड की मार्केट में काफी डिमांड है. 

आप भी इस बैंड को देखकर हैरत में हो जाएंगे. संगीन अपराधों में शामिल रहने के बाद सजा काट रहे है कैदी जोधपुर शहर के लोगों के बीच शादी के मौके पर खुशियां बांटते दिखते हैं. जोधपुर सेंट्रल जेल का यह बैंड शहर में काफी लोकप्रिय भी है. ऐसे में इसकी बुकिंग मिलना काफी मुश्किल है. मतलब आपको अगर अपने घर की शादी में इसकी बुकिंग करवानी है तो काफी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.

जोधपुर सेंट्रल जेल में सलाखों के पीछे रहते हुए ये शहर के कई हिस्सों में जाकर शादी समारोह हो या फिर कोई और समारोह ये बड़ी निपुणता के साथ बैंड बजाते हैं. जेल प्रशासन की पहल और अपने जीवन के बदलाव में इन कैदियों ने भी अपने आप में ऐसा जज्बा पैदा किया कि आज बखूबी बैंड वादन कर रहे है.

मिली है अलग पहचान
इन कैदियों को भी जेल में एक अलग पहचान मिली है. जेल की चारदिवारियों के अंदर इन्हें बैंड वाले बंदियों के बैंड के नाम से जाना जाता है. शाही अंदाज वाले इस बैंड की साज और धुनें बिल्कुल अलग और जरा हटकर हैं. वहीं, शहर में लोकप्रिय अन्य बैंड के मुकाबले काफी यह काफी सस्ता भी है और सारे लोग इसे अफोर्ड कर सकते हैं.

कैदियों के भागने का डर है बरकरार
हालांकि कुछ लोगों इस बात का डर भी है कहीं कोई बंदी फरार ना हो जाए. वैसे बैंड के साथ एक सुरक्षाकर्मी सादी वर्दी में इनके साथ जाता है.

बाजार से है सस्ता
अभी जेल की बैंड में 7 बंदी हैं और तीन घंटे की बुकिंग करीब 3,400 रुपए में होती है, जबकि कमर्शियल बैंड अमूमन 11,000 रुपए से कम में नहीं मिलता. इसके साथ ही बैंड से होने वाली कमाई का 50 फीसदी हिस्सा बैंड बजाने वाले बंदियों को दी जाती है. 

राजस्थान हाई कोर्ट में देते हैं सलामी 
जोधपुर जिले का यह बैंड साल में दो बार 15 अगस्त और 26 जनवरी पर राजस्थान हाई कोर्ट में होने वाले समारोह के दौरान झंडातोलन के दौरान सलामी देने जाता है.

बता दें, जेल नियमावली के प्रावधानों में बदलाव के बाद वर्षों से चल रही जेल बैंड की परिपाटी में ऐसे बंदियों की कमी के कारण कुछ बैंड वादकों की संख्या में कमी आई है. इसके बावजूद जेल प्रशासन ने नियमों में कुछ रियायत देकर जेल बैंड की परंपरा और इतिहास को बरकरार रखने का प्रयास किया है.