Valentine पर पढ़ें अनोखा प्रेम, मृत परिजनों की पसंदीदा चीजों के साथ बनाई जाती है प्रतिमा

प्रदेश के आदिवासी बाहुल बांसवाड़ा जिले में अपने दिवंगत परिजनों की याद को हरदम ताजा रखने के लिए आदिवासी समाज के लोगों में उनकी प्रतिमाएं बनाने की अनूठी परंपरा है. 

Valentine पर पढ़ें अनोखा प्रेम, मृत परिजनों की पसंदीदा चीजों के साथ बनाई जाती है प्रतिमा
यह स्नेह समाज में केवल चंद घंटों या एक दिन का नहीं है.

अजय ओझा, बांसवाड़ा: प्रदेश के आदिवासी बाहुल बांसवाड़ा जिले में अपने दिवंगत परिजनों की याद को ताजा रखने के लिए आदिवासी समाज के लोगों में उनकी प्रतिमाएं बनाने की अनूठी परंपरा है. स्वाभाविक या हादसे में अपनों को खो चुके परिजन अपने घर के आंगन या खेतों में उनकी पत्थर की प्रतिमा को स्थापित किए हैं.

वैलेंटाइन डे यानी प्यार के इजहार का दिन, इसे हर कोई अलग-अलग तरीके से सेलिब्रेट करता है. आज इसी खास दिन पर हम आपको अपनों के प्रति स्नेह और सर्वोच्च समर्पण की ऐसी ही रोमांचित कर देने वाली तस्वीर दिखा रहे हैं.

दरअसल, प्रदेश के आदिवासी बाहुल बांसवाड़ा जिले में अपने दिवंगत परिजनों की याद को हरदम ताजा रखने के लिए आदिवासी समाज के लोगों में उनकी प्रतिमाएं बनाने की अनूठी परंपरा है. हादसों में अपनों को खो चुके परिजन अपने घर के आंगन या खेतों में उनकी पत्थर की प्रतिमा को स्थापित करते हैं. प्रतिमाओं की खासियत भी यह रहती है कि जिसे जिस चीज का शौक था, उसकी मूर्ति भी उसी के साथ बनाई जाती है. मसलन किसी की घोड़े पर तो किसी की बाइक पर सवार तो किसी की तलवार थामें प्रतिमा बनवाई जाती है.

क्या कहना है इस समाज के लोगों का
यह स्नेह समाज में केवल चंद घंटों या एक दिन का नहीं है. यह पीढ़ियों से चला आ रहा है. इतना ही नहीं, इन प्रतिमाओं की पीढ़ी दर पीढ़ी सार संभाल की जाती है. समाज के लोगों का कहना है कि यह हमारे पूर्वजों की प्रतिमा है और हम इनकी देखभाल हमेशा से करते हैं. इनकी प्रतिमाओं को हम अपने घरो के आंगन या खेत में लगाते हैं, जिससे इनका प्रेम हम पर बना रहता है और हमारी यह रक्षा करते हैं. हमारे घर में जब भी कोई बड़ा या अच्छा काम होता है तो हम सबसे पहले इनको याद करते हैं और पूजा करके वो काम करते हैं.