राजस्थान में किसानों को नहीं होगी गोदाम की कमी, 26 जिलों में बढ़ेगी भंडारण क्षमता

गहलोत सरकार सहकारी समितियों में गोदाम बनाने जा रही है. सरकार के इस फैसले से प्रदेश के किसानों को बड़ा फायदा होगा.

राजस्थान में किसानों को नहीं होगी गोदाम की कमी, 26 जिलों में बढ़ेगी भंडारण क्षमता
सरकार अब 26 जिलों में 17 करोड़ की लागत से गोदामों का निर्माण करेगी.
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जयपुर: राजस्थान में किसानों के लिए भंडारण क्षमता की अब कोई कमी नहीं होगी. किसान सही समय पर उचित उपज का भंडार कर सकेगा. क्योंकि गहलोत सरकार सहकारी समितियों में गोदाम बनाने जा रही है. सरकार के इस फैसले से प्रदेश के किसानों को बड़ा फायदा होगा.

17 करोड़ की लागत से बनेंगे गोदाम
राजस्थान सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक ग्राम सेवा सहकारी समिति में गोदामों हो.इसके लिए सरकार अब 26 जिलों में 17 करोड़ की लागत से गोदामों का निर्माण करेगी. प्रदेश में 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के लिए प्रति समिति 12 लाख रूपए और 20 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के लिए प्रति समिति 25 लाख रूपये व्यय होंगे. इस प्रकार 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के लिए 12 करोड़ रूपए और 20 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों पर 5 करोड़ रूपये खर्च होंगे.

इन सहकारी समितियों में बनेंगे गोदाम
सहकारिता रजिस्ट्रार मुक्तानन्द अग्रवाल ने बताया कि प्रतापगढ़़ जिले में 12 ग्राम सेवा सहकारी समितियों, भीलवाड़ा में 8, बीकानेर और श्रीगंगानगर में 7, कोटा और जयपुर में 6, बारां एवं बाड़मेर में 5, उदयपुर, बांसवाड़ा, अजमेर, झुंझुनूं और दौसा में 4-4, चित्तौड़गढ़, सवाईमाधोपुर और पाली में 3-3, बूंदी, नागौर, जोधपुर, जैसलमेर, चूरू एवं हनुमानगढ़ में 2-2, सीकर, अलवर और टोंक जिले में 1-1 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन के गोदाम निर्मित होंगे.

क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में भी बढेंगे गोदाम
इसके अलावा पाली, श्रीगंगानगर और बारां जिले की 3-3 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में, टोंक, बूंदी एवं बांसवाड़ा में 2-2 और कोटा, डूंगरपुर, बाड़मेर, सीकर और अलवर जिले की 1-1 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में 250 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाए जाएंगे.

जिला प्रशासन उपलब्ध करवाएगा जमीन
इनके निर्माण के लिए प्रथम किश्त के रूप में 8.50 करोड़ रूपये दिये जा रहे है. जिन सहकारी समितियों के पास भूमि नहीं है. ऐसी समितियों में भूमि की उपलब्ध कराए जाने के लिए जिला प्रशासन के स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं. जिन समितियों में भूमि उपलब्ध होना संभव नहीं है और विद्यालयों के परिसीमन के कारण खाली हुए विद्यालय भवन उपलब्ध हैं, ऐसे भवनों को शिक्षा विभाग की सहमति से गोदाम के रूप में काम में लिया जाएगा.