राजस्थान: तापमान के साथ बढ़ी पानी की किल्लत, सूखे की चपेट में दर्जनों गांव

मरूधरा की मिट्टी सूखे की चपेट में है. पानी की एक बूंद के लिए गांव में रहने वाले हजारों परिवारों को 240 घंटों तक इतंजार करना पड़ रहा है.

राजस्थान: तापमान के साथ बढ़ी पानी की किल्लत, सूखे की चपेट में दर्जनों गांव
मीलो दूर महिलाएं पैदल चलकर पीने का पानी लाने के लिए मजबूर है.

जयपुर: 50 डिग्री तापमान में पूरा राजस्थान पानी के लिए लड़ाई लड़ रहा है. कहीं एक वक्त के पानी के लिए तो कहीं एक दिन के लिए, लेकिन जी मीडिया की पड़ताल में ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जहां एक, दो या तीन दिन नहीं बल्कि 8 से 10 दिन में एक बार पानी आ रहा है. वो भी महज 10 मिनट के लिए. राजधानी जयपुर से सिर्फ 50 किलोमीटर दूरी के गांव की है. जहां पानी के लिए दर्जनों गांव बूंद-बूंद के लिए तरस रहे है.

मरूधरा की मिट्टी सूखे की चपेट में है, जहां पानी की एक बूंद के लिए गांव में रहने वाले हजारों परिवारों को 240 घंटों तक इतंजार करना पड़ रहा है. जयपुर से महज 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई गांवों का हाल कुछ ऐसा ही है, जहां 8 से 10 दिन में केवल 10 मिनट भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे में हालात ये हो गए है कि लोग गांव से शहरों की तरफ निकलने लगे है.

पानी से संकट से जूझ रहे गांवों का जी मीडिया ने ग्राउंड जीरों पर जाकर हकीकत जानी तो हालात बेहद खराब थे. कई दिनों के बाद जब पानी घरों तक पहुंचता है तो वो पानी भी बड़े ही मुश्किल से मिल पाता है. गांव के कुंए, तालाब, बावडी सूख चुके है. वाटर लेवल इतना कम है कि अधिकतर ट्यूबवेल्स भी अपना दम तोड़ रहे है. ऐसे में केवल हैडपंप ही एक मात्र विकल्प बचता है, वो भी कभी गांव को पानी पिला पाता है. उसमें भी लंबी लाइने और 46 डिग्री के पारे से लड़कर पानी की जंग लड़नी पड़ती है. आसमान से बरस इस आग को ये चुल्लु भर पानी कैसे बुझा पा सकता है.

पानी की किल्लत से जिंदगी की इस लड़ाई में बेजुबान जानवरों का हाल और भी बुरा है. जो रोजाना पानी नहीं मिलने से दम तोड रहे है. उधर भीषण गर्मी में मीलो दूर महिलाएं पैदल चलकर पीने का पानी लाने के लिए मजबूर है.

ऐसे हालातों से लड़ने के लिए गांव में तैनात पंप चालक भी सिस्टम के सामने घुटने टैकने को मजबूर है. वो इसलिए क्योंकि एक टंकी से चार गांवों में पानी जाता है. जिसमें जलदाय विभाग ये दावा करता है कि चार दिन में एक गांव को पानी मिलेगा. लेकिन ग्राउंड जीरों पर ये दावे पूरी तरह से खोखले नजर आते है. जिन गांवों में जलदाय विभाग 4 से 5 दिन में पानी पहुंचाने का दावा कर रहा है. दरअसल वहां तो 8 से 10 के भीतर एक बार पानी पहुंच रहा है.

ये तस्वीर केवल एक गांव ही नहीं बल्कि हजारों गांवों की है, जहां पानी के लिए जिंदगी की जारी देखने को मिल रही है. जयपुर के फुलेरा, हिरनौदा, जोबनेर, छाण में भी कुछ तरह से हालात दिखाई दे रहे है. जहां गर्मी के साथ साथ पानी का कर्फ्यू भी लगा है. गांव की इस तस्वीर के सामने सरपंच और दूसरे जनप्रतिनिधि भी कुछ नहीं कर पा रहे है. क्योंकि गांव तक पीने का पानी बडी मुश्किलों से पहुंच पा रहा है, गांव में जो स्त्रोत है, वो पूरी तरह से सूख चुके है.

ढींढा गांव को बीसलपुर परियोजना से जोडने का काम तो दो साल पहले ही पूरा हो चुका है,लेकिन इसके बावजूद भी यहां तक पानी पहुंच नहीं पा रहा है. अधिकारियों की उदासीनता के चलते गांव गांव ढाणी ढाणी रोजाना प्यासी रह जाती है.