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जयपुर में आदेश देने वाले अधिकारी के ऑफिस में ही नहीं हो पा रही वाटर हार्वेस्टिंग

बारिश के पानी को सुरक्षित करने और इस्तेमाल करने के लिए सरकारी भवन और घरों में वॉटर हार्वेस्टिंग बनाने के लिए तमाम आदेश पारित किए गए हैं.

जयपुर में आदेश देने वाले अधिकारी के ऑफिस में ही नहीं हो पा रही वाटर हार्वेस्टिंग
जेडीए-निगम ने भी भवनों और आवासों को जांचने का काम शुरू कर दिया है.

दीपक गोयल/जयपुर: मानसून में आपदा प्रबंधन तैयारियों की बैठकों में जिला कलक्टर जगरूप सिंह यादव विभागों को एक के बाद एक आदेश दिए जा रहे हैं. लेकिन चौंकाने वाली बात है कि आदेशों की पालना जिला कलेक्ट्रेट में ही नहीं हो रही है. हाल ही ऐसा ही एक आदेश खुद कलक्टर के गले की फांस बन गया है. बारिश के पानी को बचाने के लिए जिला कलक्टर ने नगर निगम और जेडीए को वाटर हार्वेस्टिंग बदहाल होने की स्थिति में संबंधित भवन और आवास मालिकों को नोटिस देने के निर्देश दिए. लेकिन रोचक बात है कि खुद कलेक्ट्रेट का वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट ही सालों से बदहाल पड़ा है.

बारिश के पानी को सुरक्षित करने और इस्तेमाल करने के लिए सरकारी भवन और घरों में वॉटर हार्वेस्टिंग बनाने के लिए तमाम आदेश पारित किए गए हैं. इसके अलावा नए भवन और मकानों के नक्शे में वॉटर हार्वेस्टिंग निर्माण हेतु अनुमति अनिवार्य कर दी गई है. इसकी पालना विभाग के अधिकारी और कर्मचारी केवल कागजों में ही कर रहें है. शहर में निजी परिसरों में स्थापित वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जो क्रियाशील नहीं है, उनके बारे में संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों को लिखित में इनकी देखभाल करने की सूचना देने के कलक्टर ने आदेश दिए. कलेक्टर ने कहा कि नोटिस देने के बाद इनका निरीक्षण किया जाए और फिर भी लापरवाही या कमी पाई जाए तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मानचित्र खारिज करने जैसी कड़ी कार्यवाही करें.

जब जी मीडिया ने पड़ताल की तो सामने आया कि खुद जहां जिले के हाकिम बैठते है उसी कलेक्ट्रेट के वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट का जुड़ाव सीवरेज लाइन से हो रहा है. ऐसे में बारिश के पानी को बचाने की बजाय सीवरेज में बहाया जा रहा है. पानी का उपयोग भी नहीं हो रहा है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जिले में सबसे पहले नोटिस की शुरूआत जिला कलेक्ट्रेट से ही होनी चाहिए.

जिला कलेक्ट्रेट में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में जब जिला कलक्टर से बात की, तो कलक्टर ठहर से गए. उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. कलक्टर चौंकते हुए बोले- कहीं दिए तले अंधेरा तो नहीं. उन्होंने एडीएम प्रथम से वाटर हार्वेस्टिंग की जानकारी ली, पता चला कि प्लांट काम नहीं कर रहा है. कलक्टर जगरुप यादव ने कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर के वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट को दिखवाया गया है, उसका दो चार कनेक्शन सीवरेज से हो रहा है, उसे तुरंत प्रभाव से ठीक करवाया जाएगा. इसके अलावा जेडीए-निगम ने भी भवनों और आवासों को जांचने का काम शुरू कर दिया है.

इधर कलक्टर ने जेडीए-निगम को सरकारी भवनों और आवासों के नक्शे तक निरस्त करने के आदेश दे रखे हैं. निर्देशों में कहा गया कि पहले भवनों और निजी इमारत, आवासों में जाकर चैक करें कि वाटर हार्वेस्टिंग बना है या नहीं. फिर बदहाल स्थिति पर उन्हें मालिक के खर्चे से ही ठीक कराने का नोटिस दो, अगर नहीं है तो बनवाया जाए. फिर भी सुनवाई नहीं हो तो संबंधित भवन का नक्शा निरस्त कर दिया जाए.

पूर्व में सरकारी भवनों की छत पर जमा होने वाले बरसात के पानी को पाइप के माध्यम से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा गया. लेकिन वर्तमान में विभिन्न सरकारी कार्यालयों का सम्पर्क वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से टूट गया है. इसका कारण पाइपों का क्षतिग्रस्त होना है. विभागीय अधिकारियों ने इसकी सुध नहीं ली और पाइप टूट गए और सरकारी भवनों का वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से सम्पर्क टूट गया. ऐसे में बरसात का पानी छत पर जमा होकर जमीन पर फैल जाता है. सरकारी कार्यालयों के वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और अन्य स्थानों पर बने सिस्टम की सारसंभाल की जाए तो आने वाले बरसाती मौसम में बरसात के पानी को संरक्षित करना संभव हो सकेगा.