राजस्थान: राणा प्रताप सागर बांध पर 20 घंटे से बर्बाद हो रहा पानी, प्रशासन बेखबर

जल संसाधन की लापरवाही के चलते बहाव क्षेत्र में कई गांवों में लोगों की जान का खतरा बना हुआ है. इसके साथ-साथ कई जानवर भी बहाव क्षेत्र में आते हैं.

राजस्थान: राणा प्रताप सागर बांध पर 20 घंटे से बर्बाद हो रहा पानी, प्रशासन बेखबर
इंजीनियर्स लगातार गेट को बंद करने का प्रयास कर रहे हैं.

जयपुर: रावतभाटा के राणा प्रताप सागर बांध से जल संसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. शुक्रवार दोपहर को कोटा बैराज में पानी छोड़ने के लिए राणा प्रताप सागर बांध का गेट खोला गया था लेकिन तकनीकी खामी के चलते 20 घंटे बाद भी गेट को बंद नहीं किया जा सका. 

बहाव तेज होने के कारण कही गांवों में पानी भरने का खतरा मंडरा रहा है. बांध का पानी रोकने के लिए लगातार जल संसाधन विभाग के इंजीनियर्स कड़ी मशक्कत करते रहे, लेकिन घंटों बाद भी इंजीनियर्स की इंजीनियरिंग काम नहीं आई. रावतभाटा के साथ-साथ कोटा और बांसवाड़ा के इंजीनियर की टीम मौके पर पहुंची लेकिन समय से गेट बंद करने में नाकाम रहे. इंजीनियर्स ने स्पेयर गेट डालकर पानी रोकने का प्रयास किया लेकिन पानी के तेज बहाव की वजह से स्पेयर गेट से बांध को गेट पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सका.

गेट बंद करने के किए जा रहे प्रयास
जब बांध का पूरा गेट खुला था, जब 34 हजार क्यूसेक पानी बांध से निकल रहा था, लेकिन जब बांध पर स्पेयर गेट लगाए तक 16 हजार क्यूसेक तक पानी बह रहा था. इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी अधीक्षण अभियंता ऐजाजुद्दीन अंसारी का कहना है कि यह रूटीन प्रक्रिया थी. कोई बड़ी घटना नहीं थी. इंजीनियर्स लगातार गेट को बंद करने का प्रयास कर रहे हैं. जल्द ही गेट को बंद किया जाएगा.

लोगों का जान को है खतरा
जल संसाधन की लापरवाही के चलते बहाव क्षेत्र में कई गांवों में लोगों की जान का खतरा बना हुआ है. इसके साथ-साथ कई जानवर भी बहाव क्षेत्र में आते हैं लेकिन इसके बावजूद भी जल संसाधन विभाग ने जिला प्रशासन को इस घटना की जानकारी देना उचित नहीं समझा. ऐसी परिस्थति में अलार्म बजाकर प्रशासन और ग्रामीणों को अलर्ट किया जाता है लेकिन जल संसाधन ने ऐसा कुछ नहीं किया. वहीं कोटा चीफ इंजीनियर राजीव चौधरी भी अपने विभाग का बचाव करते नजर आए.

पहले भी हो चुकी हैं लापरवाहियां
यह पहला मौका नहीं है, जब जल संसाधन विभाग की लापरवाही सामने आई हो बल्कि इससे पहले बीसलपुर बांध का आखिरी गेट भी तकनीकी खामी के चलते नहीं खुल पाया था. ऐसे में समय रहते जल संसाधन विभाग तकनीकी खामियों को क्यों दूर नहीं करता?