आखिर पुष्कर में ही क्यों होती है ब्रह्माजी की पूजा ? झूठ बोलने से जुड़ा है पूरा मामला  

Published by: Vartika Nanda | 24 May, 2025

भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है, लेकिन उनके पूरे भारत में गिने-चुने ही मंदिर हैं, और उनमें से मुख्य पुष्कर में ही है.

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इसके पीछे की एक प्रसिद्ध पौराणिक कहानी है देवी सावित्री का श्राप, जो ब्रह्माजी की पत्नी हैं.

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पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्माजी पुष्कर में एक बड़ा यज्ञ कर रहे थे, लेकिन शुभ मुहूर्त पर सावित्री जी नहीं पहुंच पाई.

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यज्ञ पूरा करने के लिए, ब्रह्माजी ने गायत्री नामक एक कन्या से विवाह कर यज्ञ पूरा कर लिया था.

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जब देवी सावित्री वहां पहुंची और ब्रह्माजी को दूसरी पत्नी के साथ देखा, तो उन्होंने ब्रह्माजी को श्राप दे दिया. पृथ्वी पर कहीं और उनकी पूजा नहीं होगी.

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देवताओं के विनती पर सावित्री जी का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने अपने श्राप को केवल पुष्कर तक ही सीमित रखा.

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कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने भी ब्रह्माजी को एक बार झूठ बोलने पर श्राप दिया था कि उनकी पृथ्वी पर पूजा नहीं होगी.

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इन्हीं पौराणिक कथाओं के चलते, पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर विश्व में अद्वितीय बन गया है. 

Published by: Vartika Nanda | 24 May, 2025

यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Published by: Vartika Nanda | 24 May, 2025

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