चित्तौड़गढ़ किले, जहां हुए 3 बड़े हमले, फिर भी नहीं टूटी राजपूती हौसला
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
राजस्थान की वीर प्रसूता धरा पर यदि कोई स्थान साहस और स्वाभिमान का सर्वोच्च प्रतीक है, तो वह है चित्तौड़गढ़.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
180 मीटर ऊंची पहाड़ी पर शान से खड़ा यह किला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि उन हजारों वीरों और वीरांगनाओं के खून से सींची गई विरासत है, जिन्होंने झुकने के बजाय मिट जाना बेहतर समझा.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
चित्तौड़गढ़ का किला भारत के सबसे बड़े किलों में शुमार है. 700 एकड़ में फैले इस दुर्ग की विशाल प्राचीरें और आकाश को छूते बुर्ज आज भी राजसी शांति के साथ अपने गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह किला वास्तुकला और सामरिक दृष्टि से बेजोड़ है.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
चित्तौड़ के इतिहास में तीन ऐसे मोड़ आए जब दुश्मनों की विशाल सेनाओं ने इसे घेर लिया, लेकिन हर बार यहां के राजपूतों ने केसरिया बाना पहनकर और वीरांगनाओं ने जौहर की अग्नि में कूदकर अमरता प्राप्त की.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
प्रथम (1303): दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलजी ने रानी पद्मिनी की सुंदरता और साम्राज्य विस्तार की चाह में हमला किया.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
द्वितीय (1533): गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने किले पर आक्रमण कर भारी तबाही मचाई.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
तृतीय (1568): मुगल सम्राट अकबर ने किले की घेराबंदी की. इस युद्ध में जयमल और फत्ता जैसे वीरों ने अद्भुत पराक्रम दिखाया.
Published by:
Arti Patel
| 07 Mar, 2026
चार दशकों तक मुगलों के अधीन रहने के बाद, आखिरकार सन् 1616 ई. में मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल में एक संधि के तहत यह ऐतिहासिक किला पुनः राजपूतों को सौंप दिया गया.