खुशी से कांप रही थीं ये उंगलियां इतनी, डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में, पढ़ें फहमी बदायूंनी के शेर

Ansh Raj
Oct 22, 2024

मैंने गिनती सिखाई जिसको वो पहाड़ा पढ़ा रहा है मुझे

जब तलक क़ुव्वत-ए-तख़य्युल है आप पहलू से उठ नहीं सकते

काश वो रास्ते में मिल जाए मुझ को मुंह फेर कर गुज़रना है

खून पिला कर जो शेर पाला था उस ने सर्कस में नौकरी कर ली

ख़ुशी से कांप रही थीं ये उंगलियां इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में

परेशान है वो झूटा इश्क़ कर के वफ़ा करने की नौबत आ गई है

पूछ लेते वो बस मिज़ाज मेरा कितना आसान था इलाज मेरा

मैं ने उस की तरफ़ से ख़त लिखा और अपने पते पे भेज दिया

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