16 दिन क्यों पूजी जाती है गणगौर

Sneha Aggarwal
Mar 16, 2025

गणगौर आपसी स्नेह और साथ की कामना से जुड़ा है. इसे शिव और गौरी की आराधना का मंगल उत्सव भी कहा जाता है.

गणगौर का त्योहार, राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है.

गणगौर की पूजा 16 दिन इसलिए की जाती है क्योंकि यह माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन का प्रतीक है.

साथ ही यह अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की कामना के लिए मनाई जाती है.

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए 15 दिन तक कठोर तपस्या की थी और 16वें दिन भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था.

विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए गणगौर व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं.

कुंवारी लड़कियां भी गणगौर पूजा करती हैं ताकि उन्हें सुयोग्य वर मिल सके.

यह त्यौहार वैवाहिक सुख और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है.

महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और सोलह प्रकार की सामग्री से पूजा करती हैं.

दूब से पानी के 16 बार छींटे 16 शृंगार के प्रतीकों पर लगाए जाते हैं.

महिलाएं 16 दिन का व्रत रखती हैं और गणगौर माता की कथा सुनती हैं.

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