जयपुर की पहाड़ियों में मौजूद है खोले के बालाजी का मंदिर, जहां स्वयंभू हनुमान करते हैं हर मुरादें पूरी !
May 27, 2025, 01:20 PM IST
Arti
खोले के बालाजी मंदिर जयपुर-दिल्ली रोड पर, अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है
जो एक शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर धार्मिक स्थल है. जहां पर हर मंगलवार और शनिवार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ होती है.
माना जाता है कि 1960 के दशक में पंडित राधेलाल चौबे ने यहां हनुमान जी की एक विशाल लेटी हुई प्रतिमा की खोज की और आजीवन उनकी सेवा की.
'खोले' शब्द का अर्थ है 'खोह' या 'गुफा' है. कहा जाता है कि पहले यह एक सूनसान स्थान था, जहाँ पहाड़ों की खोहों से बरसाती पानी बहता था, इसीलिए इसका नाम खोले के हनुमानजी पड़ा.
मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति को स्वयंभू माना जाता है, भक्तों की गहरी आस्था है कि सच्चे मन से यहाँ दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है.
यह मंदिर पहले बहुत छोटा था, लेकिन अब यह कई एकड़ में फैल चुका है. यहाँ हरे-भरे बगीचे, अतिथि गृह और एक विशाल भोजनालय भी है.
मंदिर का निर्माण शैली काफी आकर्षक है और इसमें सुंदर चित्रकारी, जालीदार खिड़कियां, नक्काशीदार गुंबद और छतरियां हैं.
यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थान है जहाँ आने से मन को अद्भुत शांति और सुकून मिलता है.
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.