राजस्थान की 'राज-हिमानी', मारवाड़ी घोड़ी का ऐतिहासिक जन्म

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

वैज्ञानिकों ने मारवाड़ी घोड़े की नस्ल सुधार के लिए एक नई तकनीक विकसित की है.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

बीकानेर के राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान में "राज-हिमानी" का जन्म भ्रूण प्रत्यार्पण से हुआ.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

इस तकनीक में फ्रोजन सीमेन और सरोगेट मां का उपयोग किया गया.

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भ्रूण को साढ़े सात दिन बाद सरोगेट मां में स्थानांतरित किया जाता है.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

"राज-हिमानी" का जन्म 4 अक्टूबर 2023 को हुआ, जिसका वजन 35 किलो था.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

फ्रोजन सीमेन 100 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जो नस्ल सुधार में क्रांति ला सकता है.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

एक घोड़ी इस तकनीक से 20-30 बच्चे पैदा कर सकती है, जो पारंपरिक तरीके से संभव नहीं.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

मारवाड़ी घोड़ों की उत्पत्ति राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में हुई है. 2019 की पशुगणना के अनुसार, मारवाड़ी घोड़ों की संख्या तेजी से घटकर 33,267 रह गई है.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

यह तकनीक मारवाड़ी घोड़े की घटती आबादी को बचाने में मददगार हो सकती है.

Published by: Ansh Raj | 05 Sep, 2025

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