राजस्थान में ही पैदा हुआ था घेवर,  जानें कैसे पड़ा नाम..

Jul 14, 2025, 05:07 PM IST

Arti Patel

घेवर का नाम संस्कृत के 'घृतपूर' से आया है, जिसका अर्थ है "घी से भरा हुआ" या "घी का केक". यह इसके मुख्य घटक और बनावट को दर्शाता है.

यह लाजवाब मिठाई राजस्थान की देन है और माना जाता है कि यह 16वीं शताब्दी से भी पहले से यहां अस्तित्व में है.

घेवर विशेष रूप से तीज, रक्षाबंधन और गणगौर जैसे प्रमुख राजस्थानी त्योहारों का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसके बिना ये उत्सव अधूरे लगते हैं.

इसकी सबसे खास पहचान इसकी जालीदार, कुरकुरी और अनोखी बनावट है, जो इसे अन्य मिठाइयों से बिल्कुल अलग बनाती है.

 इसे मैदा, घी और चीनी से तैयार किया जाता है, जिसमें घी की मात्रा अधिक होती है, जो इसे एक समृद्ध स्वाद और बनावट देती है.

 घेवर को अक्सर मीठी चाशनी में डुबोकर तैयार किया जाता है, जिससे यह अंदर से रसीला और बाहर से कुरकुरा रहता है.

यह सिर्फ सादा नहीं होता, बल्कि मावा घेवर और पनीर घेवर जैसे विभिन्न प्रकारों में भी उपलब्ध है.

घी से भरपूर होने के कारण, घेवर ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है, जो इसे पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाता है.

घेवर सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और मिठास का एक सुंदर प्रतीक है.

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