राजस्थान का कन्हैय्या दंगल रौंगटें ना खड़े हो जाएं तो कहना

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

राजस्थान में कन्हैया दंगल एक लोक कला है. पूर्वी राजस्थान को कन्हैया दंगल का गढ़ माना जाता है, जहां यह कला सदियों से जीवित है.

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

कन्हैया दंगल मुख्य रूप से समूह में ढपली की थाप पर लोक कलाकारों द्वारा किए गए गायन को कहते हैं.

ढपली की थाप

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

यह कला विशेष रूप से मीणा समाज से जुड़ी है, जो इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हैं.

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 लगभग हर गांव में कन्हैया दंगल की अपनी टीम होती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'पार्टी' या 'जोठ' कहा जाता है.

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

एक 'पार्टी' में आमतौर पर 50-60 लोग एक साथ गायन करते हैं, जिससे एक मजबूत और प्रभावशाली आवाज पैदा होती है.

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

गायन के दौरान कुछ लोग बीच-बीच में उछल-कूद करते हुए ऊर्जा भरते हैं, जिन्हें 'मेड़िया' कहते हैं, जो दर्शकों को भी उत्साहित करते हैं.

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

इसमें मुख्य रूप से पौराणिक कथाओं और लोक गाथाओं का गायन किया जाता है.

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

पौराणिक कथाओं के माध्यम से गहरे सामाजिक संदेश दिए जाते हैं, जो समाज को प्रेरणा और शिक्षा देते हैं.

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

यह राजस्थान की एक अनूठी और खूबसूरत लोक कला है जो आज भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है.

Published by: Arti Patel | 15 Jul, 2025

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