कुरुक्षेत्र में हुई महाभारत, सीकर कैसे पहुंचा बर्बरीक का शीश

Sneha Aggarwal
Mar 12, 2025

बर्बरीक पांडु पुत्र भीम का पोते थे, जो कलयुग में खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है.

राजस्थान के सीकर की खाटू नगरी में बाबा श्याम का भव्य मंदिर हैं, जहां उनके शीश की पूजा होती है.

बर्बरीक ने तलवार से अपना सिर काटकर श्री कृष्ण को अर्पण कर दिया था.

इस बलिदान को देख श्री कृष्ण ने बर्बरीक को कलयुग में अपने नाम से पूजने का वरदान दिया.

इसके बाद बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण से युद्ध देखने की इच्छा जताई.

इस इच्छा को पूरा करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के कटे हुए शीश को एक पहाड़ी पर स्थापित किया, जहां से बर्बरीक ने पूरा युद्ध देखा.

कथाओं के अनुसार, युद्ध खत्म होने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक का शीश को रूपावती नदी में बहा दिया था.

कहते हैं कि कि कलयुग में बर्बरीक का शीश सीकर के खाटू गांव की धरती में दफन मिला था.

डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.

VIEW ALL