राजस्थान की वो जगह, जहां बिना ईसर की पूजी जाती है गणगौर

Sneha Aggarwal
Mar 18, 2025

जैसलमेर में चैत्र शुक्ला चतुर्थी को राजपरिवार गणगौर की पूजा और शाही सवारी निकालता है.

भगवान शिव पार्वती के प्रेम के प्रतीक के रूप में ईसर-गणगौर की जहां पूजा होती है.

वहीं, जैसलमेर की गणगौर अपने आप में ऐतिहासिक घटना के चलते अलग ही पहचान रखती है.

कहते हैं कि करीब 200 साल पहले बीकानेर की सेना यहां के ईसर को उठा ले गई थी.

इसके चलते जैसलमेर की गणगौर को आज भी अपने ईसर का इंतजार है.

इसी के कारण जैसलमेर में शाही गणगौर की अकेली ही पूजा होती है.

यहां की गणगौर बिना पलक झपकाए आज भी अपने ईसर का इंतजार कर रही हैं.

इस साल गणगौर 15 मार्च से 31 मार्च तक पूजी जाएगी.

गणगौर शब्द भगवान शिव और पार्वती के नाम से बना है. गण यानी भगवान शिव और गौर यानी पार्वती.

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