राजस्थान के इस राजा के दूध में लगता था 'सोने की मोहर' का तड़का

Sneha Aggarwal
Feb 13, 2025

सवाई माधोसिंह द्वितीय अपने समय में खाने-पीने की जीमणारों के लिए काफी प्रसिद्ध थे.

सवाई माधोसिंह के सोने की थाली में खाना परोसा जाता था.

कहा जाता है कि एक टाइम के खाने में अस्सी सेर के छप्पन भोग बनाए जाते थे.

लगभग 933 ग्राम का एक सेर होता था और चांदी की देगची में दाल बनती थी.

साथ ही दाल में सोने की मोहर का छौंक लगाया जाता था.

कहते हैं कि चांदी के बर्तन में दूध को कई बार गर्म करते उसमें भी स्वर्ण मोहर को चूल्हे में लाल करके छौंक लगाया जाता था.

खाने बनाने वाले शाही रसोईएं का एक महीना का खर्च 28 हजार चांदी के रुपये थे.

कहते हैं कि उनका खाने बनाने के लिए दर्जनों हलवाई, राज मेहरा और भोजन चखने वाले होते थे.

माधोसिंह नाश्ते में सवा दो सेर कलाकंद और कचौड़ी खाते थे.

माधोसिंह के लिए स्वर्ण भस्म का मुरब्बा बनाया जाता था.

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