इस व्यंजन के बिना अधूरी है राजस्थान की पहचान, सोचकर ही मुह में आ जाएगा पानी!

Aman Singh
Dec 08, 2024

राजस्थान अपने गौरवपूर्ण इतिहास, लजीज व्यंजनों के लिए दुनियाभर में मशहूर है.

ये राजस्थानी भोजन का मुख्य पहचान है. इसमें घी में डुबोई बाटी, मसालेदार दाल और मीठा चूरमा होता है.

दाल बाटी पहले युद्ध के दौरान खाई जाने वाली डिश है. राजस्थान का साम्राज्य संभालने वाले बप्पा रावल के दौर की है.

दाल बाटी चूरमा राजस्थान की थाली की शान माना जाता है. मारवाड़ी क्वीज़ीन दाल बाटी चूरमा के बिना अधूरी है.

गरमागरम लहसुन वाली दाल, लाल चटनी, घी में डूबी हुई बाटी और चूरमा से भरपूर थाली देखकर मुंह में पानी आ जाता है.

आइए जानते हैं पहली बार किसने इस डिश को बनाया था और दाल बाटी चूरमा का इतिहास क्या है.

बाटी को गेहू के मोटे आटे से बनाया जाता है. वही चुरमे में मीठे आटे का मिश्रण होता है.

आमतौर पर देखे तो दाल बाटी चूरमा दोपहर के समय खाया जाता है. इसमें घी की मात्रा ज्यादा पड़ती है जिससे इसका स्वाद और निखार के आता है.

कहा जाता है कि चूरमा का आविष्कार गलती से हुआ. पहले इसको ऊंट के दूध या दही से खाया जाता था.

चूरमे का आविष्कार मेवाड़ के गुहिलोट के रसोइए ने बाटियों पर गन्ने का रस डालकर किया था. अब जो चूरमे के रूप में विकसित हो चुका है.

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