रंगीलो राजस्थान का रंग बिरंगा पीलू, अकेले खाने कट जाएगी जीभ

Aman Singh
Mar 01, 2025

मारवाड़ भूमि भले ही बंजर हो, लेकिन प्रकृति ने कुछ अनमोल सौगातें लोगों को भी प्रदान किए है.

प्रचंड गर्मी की शुरुआत होते ही मारवाड़ में विषम हालात में भी जिंदा रहने वाले पौधे फल देना शुरू कर देते हैं.

केर-सांगरी, कुब्ट जैसी सब्जियों के साथ ही छोटे आकार के रंग-बिरंगे फल पीलू गर्मी आते ही अपनी तरफ आकर्षित करना शुरू कर देता है.

मारवाड़ के इस फल को देसी अंगूर भी कहा जाता है. घर आए मेहमानों के सामने परोसा जाता है.

मीठे रस भरे इस फल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे अकेला खाते ही जीभ छिल जाती है.

ऐसे में एक साथ पीलू के 8-10 दाने मुंह में डालने पड़ते हैं. पीलू गर्मी में लू से बचाव करता है.

मारवाड़ में जितनी अधिक गर्मी और तेज लू चलेंगी पीलू उतने ही रसीले व मीठे होते हैं.

पीलू का पेड़ बेतरतीबी से फैलाव लिए होता है। इस कारण स्थानीय मारवाड़ी भाषा में इसे जाल कहा जाता है.

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