Shayari: उसे ये शौक था हर रात एक नया हो बदन... पढ़ें बशीर बद्र के शानदार शेर

Ansh Raj
Dec 01, 2024

उसे ये शौक था हर रात एक नया हो बदन दलाल अब के जो लाया उसी की बेटी थी

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा जिस डाल पे बैठे को वो टूट भी सकती है

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए चराग़ों की तरह आँखें जलें जब शाम हो जाए

कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए

अजब हालात थे यूँ दिल का सौदा हो गया आख़िर मोहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाए

समुंदर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दे हम को हवाएँ तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाए

मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा परिंदा आसमाँ छूने में जब नाकाम हो जाए

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

मैं यूँ भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ कोई मासूम क्यूँ मेरे लिए बदनाम हो जाए

VIEW ALL