राजस्थान में शीतला अष्टमी के दिन क्यों नहीं जलता चूल्हा, बासी भोजन का भोग लगाने का क्या है कारण

Aman Singh
Mar 20, 2025

शीतला अष्टमी का त्यौहार हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक माना जाता है.

यह त्यौहार होली के बाद चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है.

इस दिन बासी भोजन खाने की परंपरा है. इसीलिए इसे बसौड़ा भी कहते हैं. इस त्यौहार में माता शीतला की पूजा का विधान है.

इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है. इसलिए इसे स्थानीय भाषा में बसौड़ा, बूढ़ा बसौड़ा या बसियौरा के नाम से भी जाना जाता है.

पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 21 मार्च को सुबह 2:45 बजे से शुरू होकर 22 मार्च को सुबह 4:23 बजे समाप्त होगी.

जिसमें मुख्य रूप से चावल और घी का भोग लगाया जाता है, लेकिन शीतला अष्टमी के दिन चावल नहीं पकाया जाता है.

बल्कि इसे सप्तमी तिथि के दिन बनाकर रख दिया जाता है और अगले दिन पूजा में उपयोग में लाया जाता है.

धार्मिक मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाना चाहिए और घर में भोजन नहीं पकाना चाहिए.

इसलिए सभी भोजन और प्रसाद सप्तमी तिथि को ही तैयार कर लिए जाते हैं.

VIEW ALL