किसके नाम पर पड़ा 1100 साल पुराने सहस्र बाहु मंदिर का नाम, जानें क्या है पूरा सच

Aman Singh
Feb 28, 2025

उदयपुर में बागेला झील के पास अरावली पर्वत में भगवान विष्णु को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है. जिसे सहस्त्र बाहु मंदिर के नाम से जाना जाता है.

ये जुड़वा प्राचीन हिंदू मंदिर भगवान शिव के उग्र रूप वीरभद्र को समर्पित है.

ये उदयपुर के पास एक छोटे से शहर नागदा में स्थित हैं. इन मंदिरों की उत्पत्ति 10वीं शताब्दी के अंत में हुई थी.

यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है और यहां 108 मंदिर हैं. नागदा मेवाड़ राजाओं की पहली राजधानी थी.

इसकी स्थापना 6वीं शताब्दी में चौथे मेवाड़ राजा नागादित्य ने की थी और यह आज भी दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है.

सहस्र बाहु मंदिर कच्छवाहा वंश के राजा महिपाल द्वारा बनवाए गए थे. राजा महिपाल ने मेवाड़ के एक हिस्से पर शासन किया था.

राजा की पत्नी भगवान विष्णु की भक्त थी. जिन्हें सहस्र बाहु के नाम से भी जाना जाता है. जिसका अर्थ हजार भुजाओं वाली है.

राजा ने रानी के लिए पसंदीदा देवता की पूजा करने के लिए मंदिर बनवाया.

बाद में राजा के बेटे का विवाह हुआ वो भगवान शिव की भक्त थी. पुत्रवधू को प्रसन्न करने के लिए राजा ने विष्णु मंदिर के बगल में भगवान शिव का मंदिर बनवाया.

समय के साथ सहस्र बाहु का नाम बिगड़कर सासबहू हो गया और मंदिरों को सासबहू मंदिर के नाम से जाना जाने लगा.

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