राजस्थान में यहां फूलों-रंगों से नहीं, बल्कि गोला-बारूद से खेली जाती है होली !

Pratiksha Maurya
Mar 11, 2025

अनूठी परंपरा

उदयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित मेनार गांव, जहां अनूठे तरीके से होली मनाई जाती है.

जमरा बीज

यहां जमरा बीज का आयोजन होता है, जिसमें बंदूक और तोप की गूंज के साथ होली खेली जाती है.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह परंपरा लगभग 500 साल पुरानी है, जब गांव वालों ने मुगलों की सेना को हराकर इस विजय को होली के रूप में मनाना शुरू किया था.

रणबांकुरों की टोलियां

ग्रामीण सेना की वेशभूषा (धोती-कुर्ता, तलवार, बंदूक, पाग आदि) पहनकर अलग-अलग रास्तों से मुख्य चौक ओंकारेश्वर पहुंचते हैं.

बारूद की होली

यहां रंगों की बजाय गोला-बारूद के साथ होली खेली जाती है, जो वीरता और इतिहास की याद दिलाती है.

सांस्कृतिक उत्सव

गांव को इस अवसर पर दीपावली जैसी सतरंगी लाइटों से सजाया जाता है और पूरा वातावरण उत्सवमय हो जाता है.

देश-विदेश से वापसी

गांव के युवा जो विदेशों में रहते हैं (जैसे दुबई, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया), वे भी इस अवसर पर गांव लौटते हैं.

महाराणा प्रताप से संबंध

यह परंपरा महाराणा प्रताप के समय की है, जब हल्दीघाटी युद्ध के दौरान मेनारवासियों ने मुगलों से मुकाबला किया था.

इतिहास में उल्लेख

इतिहासकार चंद्रशेखर शर्मा और कर्नल जेम्स टॉड ने भी इस गांव और इसकी वीरगाथा का उल्लेख किया है.

गौरव और स्वाभिमान का पर्व

जमरा बीज सिर्फ होली नहीं, बल्कि मेवाड़ के स्वाभिमान और मुगलों पर विजय का प्रतीक पर्व है.

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