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पाली में भीषण गर्मी का कहर, सूखने की कगार पर जवाई बांध

पाली जिले का ऐसा कोई उपखण्ड नहीं है जो पेयजल संकट से नहीं जूझ रहा हो. पाली जिले की लाइफ लाइन जवाई बांध ने भी जवाब दे दिया है.

पाली में भीषण गर्मी का कहर, सूखने की कगार पर जवाई बांध
पिछली बार भी मानसून की बेरुखी से जवाई में पानी नहीं आया.

सुभाष रोहिसवाल/पाली: राजस्थान का पाली जिला हर बार बारिश की बेरुखी के चलते अकाल से दो-दो हाथ करता आया लेकिन इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग ही है. जवाई बांध ने अपना तल दिखा दिया तो सरकारी कुओ ने भी जबाब दे दिया. शहर में 72 घण्टे में पानी दिया जा रहा तो गांवो की हालत बहुत दयनीय हो गई है. 7 दिन से लेकर महीनों गांवो में पानी नहीं आता है. महिलाएं चार चार किलोमीटर दूर से एक मटकी पानी लाने को मज़बूरहै. वहीं पानी माफिया 1000 से 2 हजार टेंकर पानी के ले रहे जो हर किसी के बस कि बात नहीं है. सबसे ज्यादा हालात तो जानवरो की खराब हो रही, मवेशी बिन पानी के दम तोड़ रहे लेकिन प्रशाशन इन सबके आगे अपाहिज नजर आ रहा है.  

पाली जिले का ऐसा कोई उपखण्ड नहीं है जो पेयजल संकट से नहीं जूझ रहा हो. पाली जिले की लाइफ लाइन जवाई बांध ने भी जवाब दे दिया है. मानसून अभी बहुत दूर है, राज्य में जो भी सरकार आयी बंदर बांट की तरह जवाई के पानी को अलग अलग गांवों तक पहुंचाने की घोषणा करते गई, लेकिन किसी ने भी जवाई बांध में पानी कैसे आएगा इस बारे में नहीं सोचा. जब पानी बांध में आ जाता है तो राजनीती शुरू हो जाती. पाली के आलावा जालोर सिरोही के किसानो को सिंचाई के लिए भी पानी देना पड़ता है. 

वहीं जिले में सबसे अधिक कोई उपखण्ड पानी के लिए जूझ रहा है तो वो है रोहट उपखण्ड. रोहट उपखण्ड क्षेत्र पिछले लम्बे समय से पेयजल के संकट से लड़ रहा है. पिछली बार भी मानसून की बेरुखी से जवाई में पानी नहीं आया. नेताओं ने अपने वोट बैंक को लेकर जिसकी भी सरकार रही सभी ने जवाई बांध से गावों को जोड़ते गए लेकिन जवाई में पानी आएगा कहा से ये किसी ने नहीं सोचा. हाल ही जबाई बांध में 17 फिट से भी कम पानी ही बचा है केवल 50 दिन का पानी है. पूरे जिले के अधिकांश गांवों को बांध से जोड़ दिया गया अब पानी गांवों तक पहुंचे कैसे और लोगो के हलक तर होंगे भी की नहीं ये सवाल भी उठ रहा है.
 
पाली शहर में 72 घण्टे के अंतराल में पानी दिया जा रहा वहीं गांवो में सात दिन से 15 दिन तक पानी के दर्शन तक नहीं होते. महिलाएं रोज सुबह जल्दी उठाकर एक मटकी पानी के लिए तीन से चार किलोमीटर दूर निकलती हैं और जहां भी कुंआ तालाब मिलता है पानी रे आती हैं. वो भी इतना खारा की एक घूंट पीना भी मुनासिब नहीं, फिर ङी लोग इस पानी को पीने के लिए मजबूर हैं.

वहीं पानी की समस्या पर जब जिला कलेक्टर दिनेश जैन से पूछा तो बताया की समस्या गंभीर है 151 पानी के टेंकरो की गांवों के लिए व्यवस्था की है. अब सब मानसून पर निर्भर है. साथ ही विधायक ज्ञानचंद पारख से इस समस्या को लेकर जब बात की तो वो भी चिंतित नजर आए लेकिन समाधान को लेकर असमंजस में दिखे. उन्होंने टेंकर से गांवो के पानी पहुंचाने की बात की लेकिन उसे भी अपर्याप्त बताया.

हाल ही जलदाय मंत्री बीड़ी कल्ला पाली आये थे जब उनसे पेयजल बारे में बात की तो उनका कहना की जिले में पानी की कोई समस्या नहीं है, उनके अधिकारी पूरी मुस्तैदी से लगे है और जंहा समस्या आर ही वहा पर टेंकर से पानी भिजवाया जा रहा है. लेकिन मंत्री जी को कौन बताए की अधिकारी कागजो में आंकड़े अलग बताते और हकीकत में धरातल पर कुछ अलग होता है.