उदयपुर में वन्यजीव गणना के आंकड़े जारी, मोर और सियारों की संख्या में हुई बढ़ोतरी

5 जून को वॉटरहॉल पद्धति से हुई ग्रीष्म वन्यजीव गणना के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं. 

उदयपुर में वन्यजीव गणना के आंकड़े जारी, मोर और सियारों की संख्या में हुई बढ़ोतरी
प्रतीकात्मक तस्वीर.

अविनाश जगनावत, उदयपुर: जिले के वन विभाग द्वारा जैव विविधता से समृद्ध मेवाड़ अंचल के तीन वन्यजीव मण्डलों की गत 5 जून को वॉटरहॉल पद्धति से हुई ग्रीष्म वन्यजीव गणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं. 

मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) आर.के. सिंह ने बताया कि विभागीय निर्देशों पर अधीनस्थ तीन वन्यजीव मण्डलों चितौड़गढ़ में सीतामाता, बस्सी वन्यजीव अभयारण्य और मृगवन चित्तौड़गढ़ किला, राजसमन्द में कुम्भलगढ और रावली टॉडगढ़ अभयारण्य के साथ जिले के प्रादेशिक वनक्षेत्रों में, उदयपुर वन्यजीव मण्डल में सज्जनगढ, जयसमंद, फुलवारी की नाल अभयारण्य, जवाई बांध लेपर्ड कन्जर्वेशन रिजर्व और बाघदरा नेचर पार्क में ग्रीष्म वन्यजीव गणना का कार्य किया गया.  

यह रहा वन्यजीवों का गणित
सिंह ने बताया कि इस वर्ष 5 जून को संपन्न ग्रीष्म वन्यजीव गणना में अधीनस्थ संरक्षित और अन्य क्षेत्रों के वॉटरहाल्स पर बघेरे 315, सियार 1644, जरख 447, जंगली बिल्ली 451, रस्टीस्पोटेड केट 01, लोमडी 415, भेडिया 22, भालू 320, बिज्जू 347, कब्र बिज्जू 85, चीतल 149, सांभर 521, नीलगाय 4382, चिंकारा 210, चौसिंगा 445, जंगली सुअर 2404, सेही 395, उडन गिलहरी 140, सारस 94, गिद्ध 114, जंगली मुर्गे 3924, मोर 7193 तथा मगरमच्छ 258 की संख्या में देखे गए.

उन्होंने बताया कि वन्यजीव गणना 2019 की अपेक्षा इस वर्ष की गणना में महत्वपूर्ण वन्यजीव यथा बघेरों की संख्या में 23, सियार 561, भालू 36, सांभर 39, जंगली सुअर 119, सेही 21, गिद्ध 45, जंगली मुर्गे 529, मोर 288 की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. 

बघेरे और भालू की संख्या वन्यजीवों के लिए अनुकूलता का प्रमाण
इस वर्ष हुई वन्यजीव गणना में बघेरे और भालू की संख्या में वृद्धि हुई है, जो यहां के संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीवों के आवास में सुधार और व्यापक सुरक्षा उपलब्धता की ओर इशारा करता है. इसी के परिणामस्वरूप हर्बीवॉर प्रजातियां सांभर, जंगली सुअर की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. साथ ही संकटापन्न वन्यजीव प्रजाति गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी भी वनक्षेत्रों की स्थिति में सुधार का स्पष्ट संकेत है. उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण हर्बीवोर और कार्निवोर प्रजातियों की संख्या मे वृद्धि होना, संभाग के संरक्षित क्षेत्रों के लिए निश्चित तौर पर सुखद और सुकूनदायी संकेत है.

इस तरह हुआ वन्यजीव गणना का काम
सिंह ने बताया कि तीनों वन्यजीव मण्डलों के कुल 384 वॉटरहाल्स पर वन्यजीव गणना का कार्य 5 जून प्रातः से 6 जून प्रातः तक (लगातार 24 घण्टे) प्रशिक्षित वनकार्मिकों और स्वयंसेवकों द्वारा संपादित किया गया. इन 384 वॉटरहाल्स में से 32 वॉटरहाल्स पर कैमराट्रेप विधि से वन्यजीव संख्या गणना का कार्य किया गया. इस कार्य में 255 वनकार्मिकों एवं 497 स्वयंसेवकों सहित कुल 752 व्यक्तियों ने निर्धारित वॉटरहाल्स पर 24 घण्टे तैनात रहकर गणना कार्य संपादित किया.