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राजस्थान में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद क्या मंत्रिमंडल में होंगे बदलाव?

 राजस्थान में सरकार के 23 मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रत्याशियों को बढ़त दिलाने में नाकाम साबित हुए हैं. 

राजस्थान में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद क्या मंत्रिमंडल में होंगे बदलाव?
राजस्थान में पूरा मंत्रिमंडल की बदले जाने की संभावना है.

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट सहित सरकार के 23 मंत्री ऐसे हैं जो अपने विधानसभा क्षेत्रों में भी कांग्रेस को जीत नहीं दिला पाए हैं. ऐसे में सवाल ये कि क्या कमजोर प्रदर्शन के हिसाब से मंत्री पद से हटाने का राहुल गांधी का आदेश पार्टी पर लागू हो पाएगा. लोकसभा चुनाव के जो परिणाम रहे हैं वो राजस्थान कांग्रेस के लिए ऐसी गहरे घाव हैं जिन्हें भरने में बहुत समय लगेगा. 

राजस्थान में लगातार दूसरी बार ऐसा हुआ है जब कांग्रेस 25 सीटें हार गई हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट सहित सरकार के 23 मंत्री ऐसे हैं जो अपने विधानसभा क्षेत्रों में भी कांग्रेस को जीत नहीं दिला पाए हैं. ऐसे में सवाल ये कि क्या कमजोर प्रदर्शन के हिसाब से मंत्री पद से हटाने का राहुल गांधी का आदेश पार्टी पर लागू हो पाएगा. अगर ऐसा हुआ तो राजस्थान में पूरा मंत्रिमंडल की बदले जाने की संभावना है.

चार महीने पहले राजस्थान में सत्ता में आने वाली कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में इतनी करारी हार मिली है जो बरसों तक याद रखी जाएगी. राजस्थान में कांग्रेस ने लगातार दो लोकसभा चुनाव में 25 सीटें हारी है. इस बार के लोकसभा चुनाव में जिन नेताओं पर कांग्रेस को जिताने की जिम्मेदारी थी उनके गढ़ में भी कांग्रेस का सफाया हो गया है. राजस्थान में सरकार के 23 मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रत्याशियों को बढ़त दिलाने में नाकाम साबित हुए हैं. केवल खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री और सपोटरा विधायक रमेश मीणा महिला बाल विकास विभाग मंत्री और सिकराय विधायक भूपेश ममता भूपेश के विधानसभा क्षेत्र से ही कांग्रेसी प्रत्याशियों को भाजपा के मुकाबले बढ़त मिल सकी है.

कांग्रेस के मंत्रियों में सबसे खराब प्रदर्शन कृषि मंत्री और झोटवाड़ा विधायक लालचंद कटारिया की विधानसभा क्षेत्र में रहा. लालचंद कटारिया पर आरोपी लगा कि उन्होंने कृष्णा पूनिया के लिए पर्याप्त चुनाव प्रचार नहीं किया. लालचंद कटारिया के विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा पूनिया को भाजपा के मुकाबले 115000 वोट कम मिले. सहकारिता मंत्री जो चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी से विधायक उदयलाल आंजना के क्षेत्र में कांग्रेस 66000 वोटों से पीछे रही.

राजस्व मंत्री और बायतु विधायक हरीश चौधरी के क्षेत्र में भी भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को 63000 वोट कम मिले. शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग के विधानसभा क्षेत्र भरतपुर में कांग्रेस 62000 वोटों से पिछड़ गई. परिवहन मंत्री और जयपुर के सिविल लाइन से विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास के क्षेत्र में पार्टी 56000 वोटों से पिछड़ी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जोधपुर के सरदारपुरा और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के टॉप विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त नहीं मिल पाई.

स्वास्थ्य मंत्री और कैंपेनिंग कमेटी के अध्यक्ष रघु शर्मा के विधानसभा क्षेत्र केकड़ी से कांग्रेस प्रत्याशी 39000 वोट से पिछड़ गए. खेल मंत्री हिंडोली से विधायक अशोक चांदना के क्षेत्र में कांग्रेस 36000 वोटों से पीछे रही. इसके अलावा बीडी कल्ला भंवरलाल मेघवाल प्रमोद जैन भाया गोविंद सिंह डोटासरा टीकाराम जूली राजेंद्र यादव शांति धारीवाल विश्वेंद्र सिंह सालेह मोहम्मद भजन लाल जाटव ऐसे मंत्री रहे जिनके विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.

दरअसल लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने सभी मंत्रियों को संदेश भिजवाया था कि लोकसभा चुनाव में कमजोर परफॉर्मेंस के बाद मंत्री पद छीना जा सकता है. लेकिन राजस्थान में हालात इस कदर खराब हो गई किसी को अंदाजा नहीं था राजस्थान में जो वर्तमान रिपोर्ट कार्ड बनकर तैयार हुआ है उसमें पूरा मंत्रिमंडल बदला जाए ऐसी संभावना बन गई है. ऐसे भी देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान इस करारी हार के बाद परिस्थितियों को को सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं. लेकिन इतना तय है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल होना जरूरी है और लोकप्रिय और निष्क्रिय मंत्रियों पर जरूर गाज गिरेगी.