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राजस्थान सरकार को BJP कर रही है अस्थिर, कोशिश नहीं होगी कामयाब: कांग्रेस

 विधानसभा में दलिय स्थिति को देखें तो कांग्रेस के पास सौ विधायक हैं और उसे बसपा के छह, आरएलडी के एक और 12 निर्दलीय विधायकों का खुला समर्थन है.

राजस्थान सरकार को BJP कर रही है अस्थिर, कोशिश नहीं होगी कामयाब: कांग्रेस
अब राजस्थान में राजनीतिक उठापटक की चर्चा होने लगी है.

जयपुर: लोकसभा चुनाव से पहले कुछ लोग जिस बात का अंदेशा जता रहे थे, देश के कुछ हिस्सों में वैसी ही राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है. कर्नाटक औऱ गोवा में हुई उठापटक के बाद अब राजस्थान को लेकर बयानों के दौर शुरू हो गए हैं. प्रदेश में इस हलचल को हवा पूर्व मन्त्री और बीजेपी के विधायक वासुदेव देवनानी के बयान ने दी है. देवनानी ने आने वाले दिनों में राजस्थान में भी उठापटक के संकेत दिए हैं लेकिन कांग्रेस ने भी अपनी मजबूती के दावे किये हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राजस्थान में वाकई में ऐसी हलचल संभव भी है?

केन्द्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद देश के दक्षिणी हिस्से से शुरू हुई हलचल अब नक्शे में ऊपर की तरफ बढ़ने लगी है. पहले कर्नाटक में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों और सरकार में शामिल निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे हुए. उसके बाद गोवा में कांग्रेस के दस विधायक बीजेपी में शामिल हो गए. अब राजस्थान में राजनीतिक उठापटक की चर्चा होने लगी है. पूर्व मन्त्री वासुदेव देवनानी कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद राजस्थान में पार्टी के कई नेता असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और इस असुरक्षा से राजस्थान कांग्रेस में कभी भी भगदड़ मच सकती है. 

देवनानी के बयान के समर्थन में बीजेपी के दूसरे विधायक भी उतरे. पूर्व मन्त्री कालीचरण सराफ ने प्रदेश में मध्यावधि चुनाव की आशंका जता दी. तो जयपुर के महापौर रहने के बाद पहली बार विधानसभा पहुंचे अशोक लाहोटी भी बयानों की इस रैली में शामिल हो गए.

लेकिन बीजेपी के इन शब्दबाणों का जवाब देने के लिए कांग्रेस की तरफ से लगातार दूसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंची शकुन्तला रावत ने संभाला. शकुतन्ला रावत कहती हैं कि बीजेपी ख्याली पुलाव पका रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी सरकार को अस्थिर करने की बीजेपी की किसी कोशिश को कामयाब नहीं होने देगी. कृष्णा पूनिया ने भी उनके इस सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि सरकार को कोई संकट नहीं है. पूनिया कहती हैं कि सीएम और डिप्टी सीएम प्रदेश में जनहित के लिए काम कर रहे है और पूरी पार्टी एकजुट है. 

बहरहाल सत्ताधारी कांग्रेस के पास सौ विधायकों के साथ ही आरएलडी और बसपा और एसोसिएट निर्दलीय विधायकों के साथ कम्फर्ट ज़ोन में दिख रही है. विधानसभा में दलिय स्थिति को देखें तो कांग्रेस के पास सौ विधायक हैं और उसे बसपा के छह, आरएलडी के एक और 12 निर्दलीय विधायकों का खुला समर्थन है. माकपा के दो विधायक कांग्रेस के समर्थन में नहीं है तो यह भी साफ है कि वे बीजेपी के साथ भी नहीं जाएंगे. ऐसे में बीजेपी के पास खुद के 72 विधायकों के साथ आरएलपी के 2 विधायकों और एक निर्दलीय विधायक का आंकड़ा हो सकता है. लेकिन यह आंकड़ा 101 के जादुई आंकड़े से काफी दूर होगा.

इन सबके बीच इस बात का ज़िक्र करना भी लाज़िमी हो जाता है कि लोकसभा चुनाव से पहले और बाद में भी इस तरह की चर्चाओं का दौर चला था. केन्द्र में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनने के बाद तो बीजेपी के कुछ नेता यहां तक कहने लगे थे कि आने वाले डेढ़ साल में वसुंधरा राजे को फिर से प्रदेश की मुख्यमन्त्री बनाया जाएगा. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या नेताओं के दिमाग में पहले से इस तरह की कोई रणनीति चल रही है या फिर कर्नाटक और गोवा के बाद राजस्थान में इस तरह की चर्चाएं होना मात्र एक संयोग है?