राजस्थान: शराब-बीयर पीने वालों के ग्राफ में आई भारी गिरावट, सामने आई बड़ी वजह...

लॉकडाउन में लोगों की शराब पीने की आदत में कमी हुई तो, सरकार ने कम हुए खजाने को दोबारा से भरने के लिए शराब की कीमतों में 30 प्रतिशत की वृद्धि कर दी.  

राजस्थान: शराब-बीयर पीने वालों के ग्राफ में आई भारी गिरावट, सामने आई बड़ी वजह...
अंग्रेजी-देसी शराब व बीयर की पिछले वर्ष की तुलना में कम बिक्री हुई.

जयपुर: लॉकडाउन (Lockdown) के बाद से शराब (Wine) पीने वालों का ग्राफ गिरता जा रहा है. एक तरफ शराब पीने की लत छूटने से कई परिवारों में खुशी है तो, दूसरी तरफ इसकी खपत कम होने से सरकार का खजाना मालमाल नहीं हो पा रहा है.

लॉकडाउन में लोगों की शराब पीने की आदत में कमी हुई तो, सरकार ने कम हुए खजाने को दोबारा से भरने के लिए शराब की कीमतों में 30 प्रतिशत की वृद्धि कर दी. जिससे हर बोतल पर कम से कम 30 रुपए की वृद्धि हो गई. शराब की ब्रिकी कम होने से जहां सरकार ने, मई 2019 में 857 करोड़ रुपए का टैक्स कलेक्शन शराब बिक्री से ही किया था. लेकिन मई 2020 में यह घटकर 697 करोड़ रुपए हो गया.

राजस्थान ने इस साल शराब बिक्री से 12 हजार 500 करोड़ रुपए के टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य रखा है. आबकारी विभाग के अधिकारियों की मानें तो, मई 2019 की तुलना में मई 2020 में इंडियन मैड फॉरेन लीकर (IMFL)की बिक्री में 14.1 और बीयर की बिक्री में 63.9 प्रतिशत की कमी आई है.

वहीं, जून  2019 की तुलना में जून 2020 में इंडियन मैड फॉरेन लीकर की बिक्री में 28.9 और बीयर की बिक्री में 35 प्रतिशत की कमी आई है. राजस्थान में छह महीने में शराब के टैक्स में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से शराब की बिक्री में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है.

200 रुपए की बीयर की बोतल टैक्स वृद्धि के कारण 260 रुपए की हो गई तो वहीं, गर्मी बढ़ने के साथ ही मदिरा के शौकीन ठंडी बियर की डिमांड रखते हैं और भरपूर इसका सेवन भी करते हैं. लेकिन कोरोना के चलते बीयर की मांग भी घट गई है.

आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि, जिन लोगों ने महंगी शराब पीना छोड़ दिया है. उन्होने सस्ती शराब और बीयर की तरफ रुख किया. दिलचस्प बात यह है कि, एक बोतल को अब तीन से चार दिन चलाने लगे हैं, जो पहले एक दिन से भी कम समय में खत्म कर देते थे.

दरअसल, शराब और पैट्रोल ये दो ऐसे उत्पाद हैं, जिन पर राज्य सरकारें अपनी जरूरत के हिसाब से टैक्स लगाकर सबसे ज्यादा राजस्व वसूलती हैं. अंग्रेजी-देसी शराब व बीयर की पिछले वर्ष की तुलना में कम बिक्री हुई. जिसके कारण ठेकेदार हर महीने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं. तस्करी रोकने के लिए कई टीमें लगाई गई हैं. लॉकडाउन के बाद जो उम्मीद थी उस तरह बिक्री नहीं हुई.